Durga Aarti Lyrics in Hindi

दुर्गा आरती Pdf – Maa Durga Aarti Lyrics in Hindi

🌺 दुर्गा आरती PDF – Durga Aarti Lyrics in Hindi

नवरात्रि के पावन अवसर पर जो भी भक्त सच्चे मन से माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना करता है, उस पर देवी माँ अपनी असीम कृपा बरसाती हैं। ऐसा माना जाता है कि माँ की भक्ति में लीन व्यक्ति के जीवन से सभी दुख, भय और बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं और उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।

यह विश्वास किया जाता है कि देवी की पूजा बिना आरती गाए अधूरी मानी जाती है। आरती गाने से पूजा पूर्णता को प्राप्त होती है और भक्त का मन एवं घर दोनों सकारात्मक ऊर्जाओं से भर जाते हैं। अतः जब भी आप देवी की उपासना करें, तो आरती का पाठ अवश्य करें।

नवरात्रि पर्व मनाने के अनेक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक कारण बताए गए हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध कथा है देवी दुर्गा और महिषासुर के युद्ध की। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर नामक असुर ने अहंकारवश देवी दुर्गा को विवाह का प्रस्ताव दिया था।

देवी माँ ने उसके इस प्रस्ताव को सहजता से स्वीकार तो किया, परंतु एक शर्त रखी — यदि महिषासुर युद्ध में उन्हें पराजित कर दे, तभी वे विवाह करेंगी। यह युद्ध नौ दिनों तक चला, जिसमें माँ दुर्गा ने अपने विभिन्न स्वरूपों से राक्षस का सामना किया।

अंततः दशवें दिन, अर्थात विजयादशमी के दिन, माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर धर्म और सत्य की विजय सुनिश्चित की। तभी से नवरात्रि और दशहरा का पर्व शक्ति और सद्गुण की जीत के प्रतीक रूप में मनाया जाता है।

॥ जय अम्बे गौरी – आरती ॥

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ १॥

मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चंद्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ २॥

कनक समान कलेवर
रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,
कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ३॥

केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ४॥

कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम राजत ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ५॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे,
महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,
निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ६॥

चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ७॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी,
तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ८॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा,
अरू बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ९॥

तुम ही जग की माता,
तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता,
सुख संपति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ १०॥

भुजा चार अति शोभित,
खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ ११॥

कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत,
कोटि रतन ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ १२॥

श्री अंबेजी की आरति,
जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख-संपति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥ १३॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी॥

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Jay Ambe Gauri Aarti – Durga Aarti Lyrics Image

Durga Aarti Lyrics in Hindi
Durga Aarti Lyrics in Hindi

Maa Baglamukhi Chalisa Pdf

🌼 Maa Durga Aarti – दुर्गा आरती से होने वाले लाभ 🌼

माँ दुर्गा की आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है। आरती के माध्यम से व्यक्ति देवी माँ की दिव्य शक्ति से जुड़ता है और अपने जीवन से नकारात्मकता, भय और दुखों को दूर करता है। नीचे दिए गए बिंदुओं में दुर्गा आरती के प्रमुख लाभों का विस्तारपूर्वक उल्लेख किया गया है —

🌺 सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति

जो व्यक्ति श्रद्धा से माँ दुर्गा की आरती करता है, उसके जीवन से हर प्रकार की रुकावटें और संकट स्वतः दूर होने लगते हैं। यह आरती आत्मबल बढ़ाती है और व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती है।

🕉️ नकारात्मक ऊर्जा का नाश

आरती के दौरान बजने वाले शंख और घंटी की ध्वनि आसपास फैली नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है। इससे घर और मन दोनों पवित्र व ऊर्जावान बनते हैं।

🌼 मानसिक शांति और संतुलन

आरती का नियमित पाठ करने से मन में शांति और स्थिरता आती है। यह व्यक्ति के भीतर के तनाव, भय और भ्रम को दूर करके मानसिक संतुलन बनाए रखता है।

💰 सुख, समृद्धि और सफलता

माँ दुर्गा की आराधना से व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। यह जीवन में नए अवसरों और शुभ फल की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

🌸 देवी कृपा और मनोकामना पूर्ति

जो व्यक्ति नित्य श्रद्धा से आरती करता है, उस पर माँ दुर्गा की विशेष कृपा बनी रहती है। उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में स्थायी शांति व संतोष की अनुभूति होती है।

🪔 सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास

देवी आराधना से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होता है। यह आत्मविश्वास बढ़ाती है और जीवन के प्रति आशा और विश्वास को मजबूत करती है।

माँ दुर्गा की आरती करने से जीवन में नई ऊर्जा, साहस और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। इसलिए प्रतिदिन या विशेष पर्वों पर आरती अवश्य करें और माँ दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त करें।

🌺 दुर्गा माता आरती पीडीएफ (Hindi & Marathi)

इस पोस्ट में दुर्गा माता आरती का हिंदी और मराठी संस्करण फ्री डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। माँ दुर्गा की आरती का पाठ करने से नकारात्मकता दूर होती है, शक्ति, साहस और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। नीचे दिए गए कार्ड्स से आप अपनी भाषा में आरती पढ़ सकते हैं या उसका PDF फाइल डाउनलोड कर सकते हैं।

🪔 दुर्गा माता आरती (हिंदी)

माँ दुर्गा की आरती का यह हिंदी रूप भक्तों के जीवन से दुख, भय और संकटों को दूर करता है। इस PDF में आरती के शुद्ध शब्द और पाठ-विधि दोनों दिए गए हैं।

🌸 दुर्गा आरती (मराठी)

मराठी में प्रस्तुत यह आरती माँ दुर्गा की स्तुति का प्राचीन और शक्तिशाली रूप है। इस PDF को डाउनलोड करके आप रोजाना पाठ कर सकते हैं और माता का आशीर्वाद पा सकते हैं।

यदि आपको Durga Mata Aarti PDF डाउनलोड करने में कोई समस्या आ रही है, तो कृपया कमेंट करके बताएं। पोस्ट को अपने मित्रों और परिवार के साथ जरूर साझा करें, ताकि वे भी माँ दुर्गा की कृपा से लाभान्वित हो सकें।

🪔 दुर्गा आरती की सही विधि 🪔

हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा हमेशा विधि-विधान के अनुसार की जाती है ताकि साधक को अधिकतम फल प्राप्त हो। माँ दुर्गा की आराधना भी इसी क्रम में विशेष महत्व रखती है। यदि आरती के नियमों का पालन सही तरीके से किया जाए तो माँ दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और शक्ति का आशीर्वाद देती हैं।

🌸 दुर्गा आरती करने की विधि:

  • प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजा स्थल या दुर्गा मंदिर जाएं और शांत मन से आराधना का संकल्प लें।
  • देवी माँ की प्रतिमा या चित्र पर लाल चुनरी चढ़ाएं और पुष्पमाला अर्पित करें।
  • घी या कपूर का दीपक जलाकर आरती की थाली तैयार करें।
  • आरती आरम्भ करने से पहले माँ को प्रसाद (मिष्ठान, फल, पंचमेवा) चढ़ाएं।
  • आरती करते समय “ॐ” का चिन्ह बनाएं, क्योंकि यह ब्रह्मांड की शक्तियों का प्रतीक है।
  • शंख और घंटी बजाते हुए आरती करें ताकि वातावरण पवित्र और ऊर्जावान बने।
  • आरती समाप्त होने के बाद माँ के चरणों में दंडवत प्रणाम करें और मनोकामना व्यक्त करें।
  • अंत में प्रसाद को सभी श्रद्धालुओं में वितरित करें।

🕉️ दुर्गा आरती के लिए आवश्यक पूजा सामग्री:

  • दुर्गा सप्तशती पुस्तक या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र
  • देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र
  • मिट्टी का पात्र और उसमें बोए गए जौ
  • जल से भरा कलश (तांबे, पीतल, मिट्टी या चांदी का)
  • लाल सूत्र (मौली), कपूर, रोली, चावल और सिंदूर
  • साबुत सुपारी, सिक्के, इलायची और लौंग
  • अशोक या आम के पाँच पत्ते
  • पानी वाला नारियल
  • लाल कपड़ा या चुनरी
  • फूल, फूलमाला और पंचमेवा
  • मिष्ठान (लड्डू, पेड़े आदि)
  • सुहाग सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर)
  • पीतल या मिट्टी का दिया और रुई की बत्ती
  • हवन कुंड व सामग्री (गुग्गुल, लोबान, घी, मेवा, चावल)
  • लॉन्ग का जोड़ा, कपूर और सुपारी
  • सिंदूर, हल्दी, अक्षत और धूपबत्ती
  • घंटा, शंख और थाली

इस प्रकार श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के अनुसार की गई दुर्गा आरती से माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो भक्त नियमित रूप से आरती करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और सफलता स्थायी रूप से बनी रहती है।

जय अम्बे गौरी आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)

1. जय अम्बे गौरी आरती कब करनी चाहिए?
दुर्गा माँ की आरती प्रातः और संध्या के समय करनी श्रेष्ठ मानी गई है। नवरात्रि, शुक्रवार या अष्टमी के दिन इसका विशेष फल प्राप्त होता है।

2. जय अम्बे गौरी आरती करने से क्या लाभ होते हैं?
इस आरती के पाठ से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है, जीवन से भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, और घर में सुख-शांति का वास होता है।

3. दुर्गा आरती के समय कौन सी पूजा सामग्री आवश्यक है?
आरती के लिए लाल चुनरी, फूल, दीपक, कपूर, घंटी, शंख, कलश, नारियल और मिठाई का भोग आवश्यक माना जाता है।

4. क्या जय अम्बे गौरी आरती रोज़ की जा सकती है?
हां, जो भक्त रोज़ श्रद्धा से आरती करते हैं, उन्हें माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन में आत्मबल और शांति बनी रहती है।

5. दुर्गा आरती के समय क्या ध्यान रखना चाहिए?
आरती करते समय मन को एकाग्र रखें, माँ के नाम का स्मरण करें और आरती के बाद प्रसाद व जल ग्रहण करें। मोबाइल या बातचीत से बचें।

6. जय अम्बे गौरी आरती का पाठ करने से कौन सी मनोकामना पूर्ण होती है?
यह आरती विशेष रूप से भक्ति, समृद्धि, वैवाहिक सुख और नारी-सम्मान की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी है।

7. क्या दुर्गा आरती केवल नवरात्रि में करनी चाहिए?
नहीं, इसे पूरे वर्ष किसी भी दिन किया जा सकता है। नवरात्रि में इसका महत्व अधिक होता है क्योंकि यह नौ शक्तियों की साधना का काल है।

8. जय अम्बे गौरी आरती किस भाषा में की जा सकती है?
यह आरती संस्कृत, हिंदी और मराठी – तीनों भाषाओं में लोकप्रिय है। आप अपनी सुविधा और भक्ति के अनुसार किसी भी भाषा में कर सकते हैं।

9. आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती के उपरांत माँ को प्रणाम करें, प्रसाद बांटें और कुछ पल ध्यान करें। ऐसा करने से आरती का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ जाता है।

10. जय अम्बे गौरी आरती कौन सी देवी को समर्पित है?
यह आरती माँ दुर्गा के स्वरूप “जय अम्बे गौरी” को समर्पित है, जो शक्ति, साहस और करुणा की देवी हैं।

11. क्या दुर्गा आरती करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है?
हां, आरती के दौरान जलने वाले दीपक, शंख और मंत्रों की ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है और नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है।

12. जय अम्बे गौरी आरती कितनी बार करनी चाहिए?
सामान्यतः दिन में दो बार – सुबह और शाम – आरती करना श्रेष्ठ होता है। नवरात्रि में नौ बार प्रतिदिन करने से विशेष पुण्य मिलता है।

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🛕 ईष्ट देवता

अपनी ऊर्जा, भक्ति और जीवनशक्ति के अनुसार अपने ईष्ट देवता को पहचानें —

ईष्ट देवता संपूर्ण जानकारी
🔱 शिव जीशिव
💪 हनुमान जीहनुमान
🐕‍🦺 भैरव बाबाभैरव
🌺 दुर्गा मातादुर्गा
🪔 श्री कृष्णकृष्ण
🐘 गणेश जीगणेश
⚡ काली माताकाली
🏹 श्री रामराम
🌊 विष्णु भगवानविष्णु
💰 लक्ष्मी मातालक्ष्मी

🌺 अपने ईष्टदेवता को जानें

ईष्टदेवता वह शक्ति हैं जो आपके जीवन के मार्ग को प्रकाशित करती हैं। अपने ईष्टदेवता को जानकर आत्मिक शक्ति, संतुलन और मन की शांति प्राप्त करें।

🙏 ईष्टदेवता जानें

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