श्री तुळजा भवानी स्तोत्र
श्री तुळजा भवानी स्तोत्र देवी तुळजा भवानी को समर्पित एक पवित्र भजन है।
यह स्तोत्र उनकी महिमा, शक्ति और करुणा का गुणगान करता है।
माता तुळजा भवानी महाराष्ट्र की प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक हैं और उन्हें देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है।
॥ श्री तुळजा भवानी स्तोत्र ॥
नमोस्तु ते महादेवि शिवे कल्याणि शाम्भवि ।
प्रसीद वेदविनुते जगदम्ब नमोस्तुते ॥१॥
जगतामादिभूता त्वं जगत्त्वं जगदाश्रया ।
एकाऽप्यनेकरूपासि जगदम्ब नमोस्तुते ॥२॥
सृष्टिस्थितिविनाशानां हेतुभूते मुनिस्तुते ।
प्रसीद देवविनुते जगदम्ब नमोस्तुते ॥३॥
सर्वेश्वरि नमस्तुभ्यं सर्वसौभाग्यदायिनि ।
सर्वशक्तियुतेऽनन्ते जगदम्ब नमोस्तुते ॥४॥
विविधारिष्टशमनि त्रिविधोत्पातनाशिनि ।
प्रसीद देवि ललिते जगदम्ब नमोस्तुते ॥५॥
प्रसीद करुणासिन्धो त्वत्तः कारुणिका परा ।
यतो नास्ति महादेवि जगदम्ब नमोस्तुते ॥६॥
शत्रून् जहि जयं देहि सर्वान्कामांश्च देहि मे ।
भयं नाशय रोगांश्च जगदम्ब नमोस्तुते ॥७॥
जगदम्ब नमोऽस्तु ते हिते
जय शम्भोर्दयिते महामते ।
कुलदेवि नमोऽस्तु ते सदा
हृदि मे तिष्ठ यतोऽसि सर्वदा ॥८॥
तुळजापुरवासिन्या देव्याः स्तोत्रमिदं परम् ।
यः पठेत्प्रयतो भक्त्या सर्वान्कामान्स आप्नुयात् ॥९॥
श्री तुळजापुरवासिन्या देव्याः स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।
श्री तुळजा भवानी स्तोत्र का नियमित पाठ
इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों के हृदय में देवी के प्रति भक्ति और आस्था बढ़ती है। यह स्तोत्र जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।
विशेष रूप से संकट, भय और रोगों से मुक्ति पाने के लिए इसे नियमित रूप से पढ़ा जाता है।
स्तोत्र में देवी के अनेक रूपों, उनके गुणों और जगत की रचना, स्थिति और विनाश में उनकी भूमिका का वर्णन है।
प्रत्येक श्लोक भक्त को यह स्मरण कराता है कि माता तुळजा भवानी हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनके सभी कार्यों में सहयोग देती हैं।







