🌺 श्री लक्ष्मी चालीसा – परिचय
श्री लक्ष्मी चालीसा धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माता महालक्ष्मी की वंदना का पवित्र स्तोत्र है। यह चालीसा भक्त को आर्थिक स्थिरता, मानसिक शांति और जीवन में शुभ फल प्रदान करती है। जो साधक श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करते हैं, उन्हें माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।
माता लक्ष्मी का निवास सदैव उस घर में होता है जहाँ स्वच्छता, सत्य और भक्ति का वास हो। श्री लक्ष्मी चालीसा के नियमित पाठ से दुर्भाग्य, ऋण, और दरिद्रता का नाश होता है तथा घर में धन और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
यह चालीसा विशेष रूप से शुक्रवार या दीपावली के दिन पाठ करने से अत्यंत शुभ फल देती है। भक्त जब दीपक जलाकर, कमल पुष्प और सुगंधित धूप अर्पित कर माता का ध्यान करता है, तब माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपने भक्त के जीवन में समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
॥ लक्ष्मी चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा,
करो हृदय में वास ।
मनोकामना सिद्घ करि,
परुवहु मेरी आस ॥
॥ सोरठा ॥
यही मोर अरदास,
हाथ जोड़ विनती करुं ।
सब विधि करौ सुवास,
जय जननि जगदंबिका ॥
॥ चौपाई ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही ।
ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी ।
सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा ।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥
तुम ही हो सब घट घट वासी ।
विनती यही हमारी खासी ॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी ।
दीनन की तुम हो हितकारी ॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी ।
कृपा करौ जग जननि भवानी ॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी ।
सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी ।
जगजननी विनती सुन मोरी ॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता ।
संकट हरो हमारी माता ॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो ।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो ॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी ।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी ॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा ।
रुप बदल तहं सेवा कीन्हा ॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा ।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं ।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी ।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी ।
कहं लौ महिमा कहौं बखानी ॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई ।
मन इच्छित वांछित फल पाई ॥
तजि छल कपट और चतुराई ।
पूजहिं विविध भांति मनलाई ॥
और हाल मैं कहौं बुझाई ।
जो यह पाठ करै मन लाई ॥
ताको कोई कष्ट नोई ।
मन इच्छित पावै फल सोई ॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि ।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी ॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै ।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै ॥
ताकौ कोई न रोग सतावै ।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै ॥
पुत्रहीन अरु संपति हीना ।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना ॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै ।
शंका दिल में कभी न लावै ॥
पाठ करावै दिन चालीसा ।
ता पर कृपा करैं गौरीसा ॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै ।
कमी नहीं काहू की आवै ॥
बारह मास करै जो पूजा ।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही ।
उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं ॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई ।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई ॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा ।
होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा ॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी ।
सब में व्यापित हो गुण खानी ॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं ।
तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं ॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै ।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै ॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी ।
दर्शन दजै दशा निहारी ॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी ।
तुम्हहि अछत दुःख सहते भारी ॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में ।
सब जानत हो अपने मन में ॥
रुप चतुर्भुज करके धारण ।
कष्ट मोर अब करहु निवारण ॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ।
ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई ॥
॥ दोहा ॥
त्राहि त्राहि दुख हारिणी,
हरो वेगि सब त्रास ।
जयति जयति जय लक्ष्मी,
करो शत्रु को नाश ॥
रामदास धरि ध्यान नित,
विनय करत कर जोर ।
मातु लक्ष्मी दास पर,
करहु दया की कोर ॥
🔱 जय माता लक्ष्मी की जय ॥
Lakshmi Chalisa in English
॥ Lakshmi Chalisa ॥
॥ Doha ॥
Matu Lakshmi Kari Kripa,
Karo Hriday Mein Vaas.
Manokamna Siddh Kari,
Paruvahu Meri Aas ॥
॥ Soratha ॥
Yahi Mor Ardaas,
Haath Jod Vinati Karu.
Sab Vidhi Karau Suvaas,
Jai Janani Jagadambika ॥
॥ Chaupai ॥
Sindhu Suta Main Sumirau Tohi.
Gyaan Buddhi Vidha Do Mohi ॥
Tum Samaan Nahi Koi Upkaari.
Sab Vidhi Puravahu Aas Hamaari ॥
Jai Jai Jagat Janani Jagadamba.
Sabki Tum Hi Ho Avalamba ॥
Tum Hi Ho Sab Ghat Ghat Vaasi.
Vinati Yahi Hamaari Khaasi ॥
Jagjanani Jai Sindhu Kumari.
Deenan Ki Tum Ho Hitkaari ॥
Vinavau Nitya Tumhi Maharani.
Kripa Karau Jag Janani Bhavani ॥
Kehi Vidhi Stuti Karau Tihari.
Sudhi Leejai Aparaadh Bisaari ॥
Kripa Drishti Chitvavo Mam Oori.
Jagjanani Vinati Sun Mori ॥
Gyaan Buddhi Jai Sukh Ki Daata.
Sankat Haro Hamaari Maata ॥
Ksheer Sindhu Jab Vishnu Mathaayo.
Chaudah Ratna Sindhu Mein Paayo ॥
Chaudah Ratna Mein Tum Sukha Raasi.
Seva Kiyo Prabhu Bani Daasi ॥
Jab Jab Janm Jahaan Prabhu Leenha.
Roop Badal Tahaan Seva Keenhaa ॥
Swayam Vishnu Jab Nar Tanu Dhaara.
Leenheu Avadhpuri Avataara ॥
Tab Tum Pragat Janakpur Maahin.
Seva Kiyo Hriday Pulkaahin ॥
Apnaya Tohi Antaryami.
Vishva Vidit Tribhuvan Ki Swami ॥
Tum Sam Prabal Shakti Nahi Aani.
Kahan Lau Mahima Kahau Bakhaani ॥
Man Kram Vachan Karai Sevakai.
Man Ichchhit Vaanchhit Phal Paai ॥
Taji Chal Kapat Aur Chaturai.
Poojahin Vividh Bhanti Man Laai ॥
Aur Haal Main Kahau Bujhaai.
Jo Yah Paath Karai Man Laai ॥
Tako Koi Kasht Nohi.
Man Ichchhit Paavai Phal Sohi ॥
Traahi Traahi Jai Dukh Nivaarini.
Trividh Taap Bhav Bandhan Haarini ॥
Jo Chalisa Padhai Padhavai.
Dhyaan Lagaakar Sunai Sunaavai ॥
Tako Koi Na Rog Sataavai.
Putra Aadi Dhan Sampatti Paavai ॥
Putraheen Aru Sampatti Heena.
Andh Badhir Kodhi Ati Deena ॥
Vipra Bolaay Kai Paath Karaavai.
Shanka Dil Mein Kabhi Na Laavai ॥
Paath Karaavai Din Chalisa.
Taa Par Kripa Karain Gaurisa ॥
Sukh Sampatti Bahut Si Paavai.
Kami Nahi Kaahu Ki Aavai ॥
Baarah Maas Karai Jo Pooja.
Tehi Sam Dhanya Aur Nahi Dooja ॥
Pratidin Paath Karai Man Maahi.
Un Sam Koi Jag Mein Kahoon Naahi ॥
Bahuvidhi Kya Main Karau Badaai.
Ley Pariksha Dhyaan Lagaai ॥
Kari Vishwas Karai Vrat Nema.
Hoy Siddh Upajai Ur Prema ॥
Jai Jai Jai Lakshmi Bhavani.
Sab Mein Vyapit Ho Gun Khani ॥
Tumharo Tej Prabal Jag Maahin.
Tum Sam Kou Dayalu Kahoon Naahin ॥
Mohi Anaath Ki Sudh Ab Leejai.
Sankat Kaati Bhakti Mohi Deejai ॥
Bhool Chook Kari Kshama Hamaari.
Darshan Dije Dasha Nihaari ॥
Bin Darshan Vyakul Adhikaari.
Tumhi Achhat Dukh Sahate Bhaari ॥
Nahi Mohi Gyaan Buddhi Hai Tan Mein.
Sab Jaanat Ho Apne Man Mein ॥
Roop Chaturbhuj Karke Dhaaran.
Kasht Mor Ab Karahu Nivaaran ॥
Kehi Prakaar Main Karau Badaai.
Gyaan Buddhi Mohi Nahi Adhikaai ॥
॥ Doha ॥
Traahi Traahi Dukh Haarini,
Haro Veg Sab Traas.
Jayati Jayati Jai Lakshmi,
Karo Shatru Ko Naash ॥
Ramdas Dhari Dhyaan Nit,
Vinay Karat Kar Jor.
Matu Lakshmi Daas Par,
Karahu Daya Ki Kaur ॥
🔱 Jai Mata Lakshmi Ki Jai ॥
श्री लक्ष्मी चालीसा पाठ से होने वाले लाभ और महत्व
“श्री लक्ष्मी चालीसा” माता लक्ष्मी की आराधना का पवित्र स्तोत्र है। इसका पाठ करने से जीवन में धन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। नीचे लक्ष्मी चालीसा पाठ के प्रमुख लाभ और उसके आध्यात्मिक प्रभाव बताए गए हैं —
💰 धन और समृद्धि की प्राप्ति
लक्ष्मी चालीसा के नियमित पाठ से व्यक्ति के जीवन में धन, वैभव और समृद्धि का वास होता है। आर्थिक संकट दूर होकर स्थायी सुख-शांति प्राप्त होती है।
🌸 घर में सौभाग्य और सुख-शांति
माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सौभाग्य, प्रेम और पारिवारिक एकता बढ़ती है। नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होकर शुभ ऊर्जा का संचार होता है।
📈 व्यापार और करियर में प्रगति
माता लक्ष्मी का आशीर्वाद व्यापार, नौकरी और करियर में निरंतर उन्नति दिलाता है। प्रयासों में सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है।
🪔 दरिद्रता और ऋण से मुक्ति
जो व्यक्ति श्रद्धा से चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और ऋण का अंत होता है। यह पाठ आर्थिक स्थिरता का मार्ग प्रशस्त करता है।
🧘 मन की शांति और सकारात्मकता
लक्ष्मी माता का स्मरण मन को शुद्ध और शांत बनाता है। इससे जीवन में आत्मविश्वास, श्रद्धा और संतुलन आता है।
🌺 मोक्ष और भक्ति की प्राप्ति
यह पाठ आत्मिक शक्ति को बढ़ाता है और जीवन में भक्ति एवं वैराग्य का भाव जाग्रत करता है। इससे साधक को मोक्ष की दिशा प्राप्त होती है।
श्री लक्ष्मी चालीसा का श्रद्धा और नियमपूर्वक पाठ करने से दरिद्रता, दुःख और तनाव दूर होते हैं। माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में धन, सौभाग्य और सुख-शांति का वास होता है।
🌺 श्री लक्ष्मी चालीसा PDF
माँ लक्ष्मी की यह पवित्र चालीसा धन, सुख, सौभाग्य और समृद्धि का स्रोत मानी जाती है। जो भक्त प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति से इसका पाठ करता है, उसे धन, वैभव और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। नीचे दिए गए बटन से आप इस चालीसा को ऑनलाइन पढ़ सकते हैं या PDF डाउनलोड कर सकते हैं।
श्री लक्ष्मी चालीसा / पूजन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. श्री लक्ष्मी चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
शुक्रवार या पूर्णिमा के दिन सुबह या संध्या के समय पढ़ना सर्वोत्तम माना गया है। दीपक जलाकर, माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के समक्ष पाठ करें।
2. लक्ष्मी पूजा के लिए आवश्यक सामग्री क्या है?
चावल, दीप, कपूर, लाल पुष्प, दूध, मिठाई, सिक्के, कलश, नारियल, कमल पुष्प और श्रीफल — ये पूजन के मुख्य घटक हैं।
3. क्या रोज़ लक्ष्मी चालीसा पढ़ सकते हैं?
हाँ, रोज़ सुबह स्नान के बाद शांत मन से पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है; यह धन, सुख और शांति प्रदान करता है।
4. क्या महिलाएँ भी लक्ष्मी चालीसा का पाठ कर सकती हैं?
निश्चित रूप से, माँ लक्ष्मी की कृपा सभी भक्तों पर समान होती है। महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा और स्वच्छता के साथ पाठ कर सकती हैं।
5. लक्ष्मी चालीसा पाठ से क्या लाभ होते हैं?
धन की वृद्धि, दरिद्रता का नाश, घर में सौभाग्य, शांति और प्रसन्नता का वास होता है। जीवन में स्थिरता और प्रगति आती है।
6. लक्ष्मी पूजन के समय कौन-सी दिशा में बैठना शुभ है?
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुख न करें।
7. क्या चालीसा सुनने से भी लाभ होता है?
हाँ, माँ के नाम का श्रवण भी पुण्यकारी है। ध्यानपूर्वक सुनने से मन में सकारात्मक ऊर्जा और धनवृद्धि के योग बनते हैं।
8. क्या किसी विशेष दिन इसका पाठ करना सबसे प्रभावी है?
दीपावली, अक्षय तृतीया, कोजागरी पूर्णिमा और शुक्रवार के दिन पाठ अत्यधिक फलदायी होता है।
9. पाठ के बाद क्या करना चाहिए?
पाठ के पश्चात् आरती करें, प्रसाद चढ़ाएँ और परिवार के साथ बाँटें। दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
10. क्या लक्ष्मी जी क्रोधित भी होती हैं?
हाँ, आलस्य, अपव्यय, असत्य और अपवित्रता से माँ लक्ष्मी अप्रसन्न होती हैं। सदाचार और सादगी से वे प्रसन्न रहती हैं।





