Siddha Kunjika Stotra
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र PDF
Siddha Kunjika Stotra : हिंदू धर्म में जब भी शक्ति साधना और माँ दुर्गा की उपासना की बात होती है, तो “सिद्ध कुंजिका स्तोत्र” का विशेष महत्व माना जाता है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का ही एक गूढ़ और संक्षिप्त रूप है, जिसे पढ़ने से साधक को सप्तशती पाठ के समान फल प्राप्त होता है।
🔱 सिद्ध कुंजिका स्तोत्र क्या है? 🔱
‘कुंजिका’ शब्द का अर्थ है — चाबी या ताला खोलने वाली चाबी। माना जाता है कि जैसे किसी ताले को खोलने के लिए चाबी चाहिए, वैसे ही दुर्गा सप्तशती के गूढ़ रहस्यों को खोलने की चाबी यह स्तोत्र है। साधना करने वाले भक्तों के लिए यह एक सरल और प्रभावी माध्यम है, जिससे वे माता की कृपा शीघ्र प्राप्त कर सकते हैं।
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सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का मधुर और शक्तिशाली ऑडियो संस्करण सुनें। इसका नियमित श्रवण मन को शांति देता है और देवी शक्ति का अनुभव कराता है।
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🔱 शिव उवाच 🔱
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत ॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥2॥
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥3॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।
पाठमात्रेण संसिद्ध् येत् कुंजिकास्तोत्र मुत्तमम् ॥4॥
॥ अथ मंत्र: ॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ॥
॥ इति मंत्र: ॥
नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि ।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥1॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि ।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे ॥2॥
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका ।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ॥3॥
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि ॥4॥
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥5॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥6॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं ।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥7॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिं कुरुष्व मे ॥8॥
इदं तु कुंजिकास्तोत्रं मंत्र जागर्तिहेतवे ।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥
यस्तु कुंजिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥
॥ इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वती संवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
॥ ॐ तत्-सत् ॥
Saptashati Siddha Kunjika Stotra Lyrics Image

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र अर्थ (हिंदी)
शिवजी ने कहा – “हे देवी! सुनो। मैं तुम्हें उत्तम कुंजिका स्तोत्र का ज्ञान दूँगा। इस मंत्र का प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि केवल इसके जप से ही स्तोत्र का फल प्राप्त होता है।” (१)
कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास या अर्चन जैसी कोई अतिरिक्त क्रिया आवश्यक नहीं है। (२)
सिर्फ कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से दुर्गा पाठ का पूरा लाभ मिलता है। यह स्तोत्र अत्यंत गुप्त है और देवताओं के लिए भी दुर्लभ माना जाता है। (३)
हे पार्वती! इसे अपने आप ही सुरक्षित और गुप्त रखो, जैसे कोई अमूल्य रत्न। यह कुंजिका स्तोत्र पाठ से मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन और उच्चाटन जैसी शक्तियां प्राप्त होती हैं। (४)
मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।
(मंत्र में प्रयुक्त बीजों का अर्थ जानना आवश्यक नहीं। केवल जप ही पर्याप्त है।)
स्तोत्र के प्रारंभिक अर्थ
1. हे रुद्ररूपिणी देवी! तुम्हें मेरा प्रणाम।
हे मधु दैत्य संहारिणी! तुम्हें मेरा नमस्कार।
हे कैटभ विनाशिनी! महिषासुर संहारिणी देवी! तुम्हें प्रणाम।
2. शुम्भ और निशुम्भ को हराने वाली देवी! तुम्हें बार-बार नमन।
3. हे महादेवी! मेरे जप को सिद्ध और जाग्रत करो।
– ‘ऐं’ रूप में सृष्टिकर्ता,
– ‘ह्रीं’ रूप में सृष्टि पालन करने वाली,
– ‘क्लीं’ रूप में काम और ब्रह्मांड की बीजस्वरूपिणी।
4. चामुंडा रूप में चण्डविनाशिनी और ‘यै’ स्वरूप में वर देने वाली देवी।
5. ‘विच्चे’ रूप में नित्य अभय देने वाली। इस प्रकार ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे में तुम्हारा स्वरूप है।
6. ‘धां धीं धूं’ – शिव की पत्नी धूर्जटी,
‘वां वीं वूं’ – वाणी की अधीश्वरी,
‘क्रां क्रीं क्रूं’ – कालिकादेवी,
‘शां शीं शूं’ – कल्याण देने वाली।
7. ‘हुं हुं हुंकार’ – शक्ति स्वरूप,
‘जं जं जं’ – जम्भनादिनी,
‘भ्रां भ्रीं भ्रूं’ – कल्याणकारी भैरवी भवानी। तुम्हें बार-बार प्रणाम।
8. ‘अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं धिजाग्रं’ – इन्हें तोड़ो और प्रकाशित करो।
‘पां पीं पूं’ – पार्वती पूर्णा,
‘खां खीं खूं’ – खेचरी मुद्रा अथवा आकाशचरिणी।
9. ‘सां सीं सूं’ – सप्तशती देवी के मंत्रों को मेरे लिए सिद्ध करो। यह सिद्धकुंजिका स्तोत्र मंत्र जाग्रत करने के लिए है। इसे ग़ैरभक्त को नहीं देना चाहिए।
हे पार्वती! इस मंत्र को हमेशा गुप्त रखो। बिना कुंजिका के सप्तशती का पाठ करने वाले को वही सिद्धि नहीं मिलती, जैसे वन में निरर्थक रोना।
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Siddha Kunjika Stotra in English
Siddha Kunjika Stotram
🔱 शिव उवाच 🔱
Srunu Devi Pravakshyami Kunjika Stotra Muthamam ।
Yena Matra Prabhavena Chandi Japa Shubho Bhaveth ॥1॥
Na Kavacham, Na Argala Stotram, Kilakam, Na Rahasykam ।
Na Sooktham Napi Dhyanam Cha Na Nyaso Na Cha Varchanam ॥2॥
Kunjika Pata Mathrena Durga Phalam Labheth ।
Athi Guhyataram Devi, Devanamapi Durlabham ॥3॥
Gopaneeyam Prayathnena Swayoniriva Parvathi ।
Maranam, Mohanam, Vasyam, Sthambho, Uchchadanadhikam ।
Path Mathrena Sam Sidhayeth Kunjika Stotram Uthamam ॥4॥
॥ अथ मंत्र ॥
Om Aim, Hreem, Kleem Chamundayai Viche ।
Om Gloum Hoom Kleem Joom Sah, Jwalaya Jwalaya, Jwala Jwala, Prajwala Prajwala ।
Aim Hreem Kleem Chamundayai Viche, Jwala Ham Sam Lam Ksham Phat Swaha ॥
॥ इति मंत्र ॥
Namasthe Rudra Roopinyai, Namsthe Madhu Mardini ।
Nama Kaidabha Harinyai, Namasthe Mahishardhini ॥1॥
Namasthe Shumbha Hanthryai Cha Nishumbhasura Gathini ।
Jagratham Hi Maha Devi, Japam Sidham Kurushwa May ॥2॥
Aimkari Srushti Roopayai Hreem Kari Prathi Palika ।
Kleemkari Kaam Roopinyai, Bheeja Roope Namosthuthe ॥3॥
Chamunda Chanda Gathi Cha Yaikari Varadhayini ।
Viche Cha Abhayadha Nithyam Namasthe Manthra Roopini ॥4॥
Dham Dheem Dhoom Dhoorjate Pathni, Vaam Veem Voom Vagadheeswari ।
Kraam Kreem Kroom Kalka Devi, Saam Seem Soom May Shubham Kuru ॥5॥
Hoom Hoom Hoomkara Roopinyai, Jam Jam Jam Jambha Nadhini ।
Breem Breem Broom Bhairavi, Bhadre Bhavanyai They Namo Nama ॥6॥
Aam Kam Tam Pam Yam Sam Veem Dhoom Iym Veem Ham Ksham ।
Dhijagram Dhijagram Throtaya Throtaya Deeptham Kuru Kuru Swaha ॥7॥
Paam Peem Pum Parvathi Poorna, Khaam Kheem Khoom Khechari Thadha ।
Saam Seem Soom Sapthasathi Devyaa Manthra Sidham Kurushwa May ॥8॥
Idham Thu Kunjika Stotram Manthra Jagarthi Hethave ।
Abhakthe Naiva Dhatavyam, Gopitham Raksha Parvathi ॥
Yasthu Kunjikaya Devi Heenaam Sapthasathim Padeth ।
Na Thasya Jayathe Sidhir Aranye Rodhanam Yatha ॥
॥ इति श्री रुद्रयामले गौरितंत्रे शिवपार्वती संवादे कुञ्जिका स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
॥ Om Tatsat ॥
📜 सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र PDF पढ़ें व डाउनलोड करें
माँ चण्डी की कृपा प्राप्त करने और सिद्धि प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए लिंक से सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र का पाठ करें या PDF डाउनलोड करें। यह दोनों भाषाओं — हिंदी और English — में उपलब्ध है।
📕 सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र (हिंदी)
पूर्ण पाठ, अर्थ व लाभ सहित सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र का संपूर्ण हिंदी संस्करण। देवी उपासना और नवरात्रि साधना हेतु अत्यंत शुभ।
📘 Siddha Kunjika Stotram (English)
Complete transliteration, meaning and benefits of Siddha Kunjika Stotram in English. Ideal for daily recitation and Navratri worship.
🙏 नोट: यह PDF भक्ति, अध्ययन और नवरात्रि साधना हेतु निःशुल्क उपलब्ध है। इसका पाठ करने से साधक को सिद्धि, रक्षा और माँ की दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
🔱 आध्यात्मिक महत्व 🔱
इस स्तोत्र का पाठ करने से साधक के जीवन से भय, शंका और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।
यह साधना साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा देती है।
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माना जाता है कि कुंजिका स्तोत्र, माँ दुर्गा के उन रहस्यमयी बीज मंत्रों से बना है, जो देवी की वास्तविक शक्ति को जगाते हैं।
🕉️ पाठ का समय और विधि 🕉️
नवरात्रि या विशेष मंगलवार/शुक्रवार को इसका पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।
सुबह स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर, माँ दुर्गा के चित्र अथवा प्रतिमा के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाकर शुरुआत करनी चाहिए।
स्तोत्र का पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ करना आवश्यक है।
✨ सिद्ध कुंजिका स्तोत्र क्यों खास है ✨
दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ लंबा और जटिल होता है, जिसे हर कोई नियमित रूप से नहीं कर पाता।
लेकिन सिद्ध कुंजिका स्तोत्र छोटा, सरल और प्रभावी है — इसलिए यह हर वर्ग के भक्त के लिए सुलभ माना गया है।
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साधक चाहे विद्यार्थी हो, गृहस्थ हो या नौकरीपेशा, सब इसे आसानी से कर सकते हैं।
Siddha Kunjika Stotram – (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र क्या है?
यह देवी चंडी का एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जो दुर्गा सप्तशती के सभी फल केवल इसके जप से प्रदान करता है।
2. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
इसे प्रतिदिन प्रातः या नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम श्रद्धा से पढ़ना श्रेष्ठ माना गया है।
3. क्या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र पढ़ने से पहले कोई विधि करनी होती है?
नहीं, इस स्तोत्र का प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि इसे बिना किसी विशेष विधि या न्यास के भी पढ़ा जा सकता है।
4. क्या इसे घर में पढ़ सकते हैं?
हाँ, इसे शुद्ध स्थान पर दीपक जलाकर या मन में देवी का ध्यान कर के घर पर पढ़ सकते हैं।
5. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र किस देवी को समर्पित है?
यह माँ चामुंडा, दुर्गा और आदिशक्ति के संयुक्त स्वरूप को समर्पित स्तोत्र है।
6. क्या कुंजिका स्तोत्र का अर्थ जानना जरूरी है?
नहीं, केवल श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करना ही पर्याप्त है, फिर भी अर्थ समझने से साधना गहरी होती है।
7. क्या इसका पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है?
हाँ, यह स्तोत्र किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है, विशेषकर मंगलवार, शुक्रवार और नवरात्रि में इसका प्रभाव अत्यधिक होता है।
8. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
यह मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है, नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है और देवी कृपा प्राप्त कराता है।
9. क्या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र ऑनलाइन या PDF में उपलब्ध है?
हाँ, आप इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों में PDF और MP3 ऑडियो रूप में डाउनलोड या ऑनलाइन सुन सकते हैं।
10. क्या सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का जप अकेले किया जा सकता है?
हाँ, यह व्यक्तिगत साधना के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त है। इसे श्रद्धा से जपने वाला साधक दिव्य ऊर्जा का अनुभव करता है।
Read here – साँसों की माला पे सिमरूं मैं भजन
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Tip: Siddha Kunjika stotra taken from Devi Mahatmya







