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श्री गणेश चालीसा हिंदी | Shri Ganesh Chalisa Hindi pdf

परमपूज्य राम सुन्दरदास रचित भगवान गणेश को समर्पित है जो की अवधी भाषा में लिखी है। यह भगवान गणेश को एक काव्यात्मक श्रद्धांजलि है, और इसे पीढ़ियों से संजोकर रखा गया है।

गश्री गणेश चालीसा भगवान गणेश की महिमा का अनुपम स्तोत्र है, जिसे पढ़ने और स्मरण करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है।

यह चालीसा विशेष रूप से विघ्नहर्ता, बुद्धि प्रदाता और कल्याणकारी गणेश जी को समर्पित है। प्रत्येक चौपाई में उनके रूप, गुण और अद्भुत लीला का वर्णन है, जो भक्तों के मन में भक्ति और श्रद्धा को जाग्रत करता है।

गणेश चालीसा का नियमित पाठ घर और परिवार में शांति, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। इसे पढ़ने से मन शांत होता है, कार्य सफल होते हैं और नए प्रयासों में सफलता प्राप्त होती है।

यह स्तोत्र न केवल भक्तों के आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध करता है, बल्कि उनकी बुद्धि और विवेक को भी प्रबल बनाता है।

भगवान गणेश को “विघ्नहर्ता” और “सर्वगुण संपन्न” माना जाता है। उनकी उपासना से जीवन के हर क्षेत्र में बाधाओं का नाश होता है और मार्ग सुगम बनता है।

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गणेश चालीसा

॥ दोहा ॥

जय गणपति सदगुण सदन,
कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण,
जय जय गिरिजालाल ॥


जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभहु काजू ॥1॥

जै गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥2॥

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावना ॥3॥

राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥4॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥5॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित ॥6॥

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।
गौरी लालन विश्वविख्याता ॥7॥

रिद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।
मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥8॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।
अति शुची पावन मंगलकारी ॥9॥

एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥10॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥11॥

अतिथि जानी के गौरी सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥12॥

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥13॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण यहि काला ॥14॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥15॥

अस कही अन्तर्धान रूप हवै।
पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥16॥

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥17॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥18॥

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥19॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा ॥20॥

निज अवगुण गुणि शनि मन माहीं।
बालक, देखन चाहत नाहीं ॥21॥

गिरिजा कछु मन भेद बढायो।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥22॥

कहना लगे शनि, मन सकुचाई।
का करिहौं, शिशु मोहि दिखाई ॥23॥

नाचीकर उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥24॥

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥25॥

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥26॥

हाहाकार मच्यौ कैलाशा।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥27॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।
काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥28॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥29॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥30॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥31॥

चले षडानन, भरमि भुलाई।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥32॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिणा कीन्हें ॥33॥

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥34॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहसमुख सके न गाई ॥35॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥36॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥37॥

अब प्रभु दया दीना पर कीजै।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥38॥

॥ दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा,
पाठ करै कर ध्यान ॥39॥

नित नव मंगल गृह बसै,
लहे जगत सन्मान ॥40॥

सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

गणेश चालीसा का अर्थ

1. हे सभी गुणों से युक्त भगवान श्रीगणेश! आपकी जय हो, सभी कवि भी आपको कृपा दृष्टि रखने वाला बताते हैं।

2. आप हम सभी के कष्टों का निवारण कर हमारा कल्याण करते हो। हे माता पार्वती के प्रिय पुत्र! आपकी सदा जय हो।

3. हे सभी देवताओं के स्वामी! आप सभी कार्यों को मंगलकारी बना देते हो और सभी का कल्याण करते हो। आपकी जय हो।

4. आपका शरीर हाथी के समान विशाल है, आप हर घर में सुख और शांति प्रदान करते हो और सभी को बुद्धि देते हो।

5. आपकी नाक हाथी के सूंड जैसी मुड़ी हुई है, और माथे पर तिलक सभी के मन को मोह लेता है।

6. आपकी छाती पर रत्नों से जड़ी माला है, सिर पर सोने का मुकुट है और आपकी आँखें बहुत विशाल हैं।

7. आपके हाथ में पुस्तक, कुल्हाड़ी और त्रिशूल हैं, साथ ही मोदक और सुगंधित फूलों का भोग भी लगाया जाता है।

8. आपने पीले वस्त्र धारण किए हैं और आपके चरण इतने आकर्षक हैं कि ऋषि-मुनि भी मोहित हो जाते हैं।

9. आप भगवान शिव के पुत्र और माता पार्वती के प्रिय पुत्र हैं। आप विश्व के विधाता भी हैं।

10. आपकी पत्नियाँ ऋद्धि और सिद्धि हमेशा आपकी सेवा में तत्पर रहती हैं और आपका वाहन मूषक भी आपके द्वार पर रहता है।

11. आपके जन्म की शुभ कथा सुनना सभी के लिए मंगलकारी है।

12. माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी।

13. तपस्या पूरी होने पर आप ब्राह्मण का वेश धारण कर वहां आए।

14. माता पार्वती ने आपका सत्कार किया और बहुत सेवा की।

15. प्रसन्न होकर आपने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया।

16. आपने स्वयं को पुत्र रूप में प्राप्त किया, बुद्धि में अद्वितीय।

17. वह पुत्र सभी देवताओं का राजा और ज्ञान का स्रोत होगा, और प्रथम पूज्य होगा।

18. माता पार्वती को आशीर्वाद देकर आप बालक रूप में परिवर्तित हो गए।

19. माता पार्वती ने आपको उठाया, आप शिशु की तरह रोए, उनका मन आनंदित हुआ।

20. सभी देवताओं ने नृत्य किया और आकाश से पुष्प बरसाए।

21. भगवान शिव और माता पार्वती ने दान किया और देवता व ऋषि-मुनि आपके दर्शन के लिए आए।

22. आपके दर्शन से सभी आनंदित हुए और शनि देव भी आपके दर्शन करने पहुंचे।

23. शनि देव चाहते थे कि उनके अवगुणों से आपको कोई हानि न पहुंचे।

24. माता पार्वती ने शनि देव से कहा कि आप उत्सव से प्रसन्न हैं या नहीं।

25. शनिदेव ने हिचकते हुए कहा कि शिशु को दिखाने से अनिष्ट हो सकता है।

26. माता पार्वती को विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने शनि देव को शिशु दिखाने को कहा।

27. जैसे ही शनि देव ने दृष्टि डाली, शिशु का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ा।

28. माता पार्वती इतनी व्याकुल हुईं कि नीचे गिर पड़ीं।

29. भगवान विष्णु गरुड़ पर आए और अपने चक्र से हाथी का सिर काटकर लाए।

30. भगवान विष्णु ने हाथी का सिर शिशु के धड़ पर रखा, शिव ने मंत्रों से प्राण डाल दिए।

31. भगवान शिव ने आपका नाम गणेश रखा और आशीर्वाद दिया कि आपकी पूजा सर्वप्रथम होगी।

32. शिव ने आपकी बुद्धि परीक्षा ली और प्रदक्षिणा करने को कहा।

33. आपने माता-पिता के चरण छुए और सात बार परिक्रमा की।

34. भगवान शिव प्रसन्न हुए और आकाश से पुष्प वर्षा हुई।

35. आपकी बुद्धि का बखान हजारों मुख भी नहीं कर सकते।

36. मैं बुद्धिहीन, पापी और दुखी हूँ, मैं कैसे आपकी भक्ति करूँ।

37. मैं रामसुंदर आपका भक्त हूँ और आपके भजन करता हूँ।

38. हे प्रभु! अपनी दया और शक्ति प्रदान कीजिए।

दोहा का अर्थ

39. जो भी भक्त इस गणेश चालीसा का नियमित पाठ करता है, उसके घर में मंगल कार्य होते हैं और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है।

40. हजारों संबंधों की देखभाल करते हुए, ऋषि पंचमी के दिन यह गणेश चालीसा पूरी हुई।

विघ्न और बाधाओं का नाश – गणेश जी विघ्नहर्ता हैं। इस चालीसा का पाठ करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं और कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

सफलता और उन्नति – नियमित पाठ से कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन में तरक्की के मार्ग खुलते हैं।

बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि – गणेश जी को बुद्धि प्रदाता माना जाता है। उनकी स्तुति से मन और बुद्धि प्रबल होती है।

शांति और सुख – घर और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, और मानसिक तनाव कम होता है।

आध्यात्मिक लाभ – चालीसा का पाठ आत्मिक विकास और भगवान गणेश के प्रति भक्ति की वृद्धि करता है।

मंगल और कल्याण – यह स्तोत्र पढ़ने से जीवन में संपूर्ण मंगल और कल्याण की प्राप्ति होती है।

श्री गणेश चालीसा FAQs

1. श्री गणेश चालीसा क्या है?

श्री गणेश चालीसा भगवान गणेश को समर्पित 40 श्लोकों का भक्ति स्तोत्र है। इसे पढ़ने से भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

2. गणेश चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

गणेश चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन मंगलवार और बुधवार को या किसी विशेष कार्य से पहले करना शुभ माना जाता है।

3. गणेश चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?

इस चालीसा का नियमित पाठ करने से सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं, बुद्धि में वृद्धि होती है, और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

4. क्या गणेश चालीसा का जाप मात्र से ही लाभ मिलता है?

हां, श्रद्धा और भक्ति के साथ पढ़ने पर ही इसका पूर्ण लाभ मिलता है। पाठ के साथ ध्यान और निष्ठा आवश्यक है।

5. कितने श्लोक हैं गणेश चालीसा में?

श्री गणेश चालीसा में कुल 40 श्लोक (चौपाई और दोहा सहित) हैं।

6. क्या गणेश चालीसा का अर्थ भी पढ़ना चाहिए?

हां, अर्थ समझकर पाठ करने से भक्ति और ज्ञान दोनों का लाभ मिलता है और मंत्र की शक्ति बढ़ती है।

7. क्या गणेश चालीसा पढ़ने से बाधाओं का नाश निश्चित है?

गणेश जी के आशीर्वाद से बाधाएं कम होती हैं, लेकिन सच्ची भक्ति, कर्म और श्रद्धा भी महत्वपूर्ण हैं।

8. गणेश चालीसा का महत्व कौन से ग्रंथों में बताया गया है?

गणेश चालीसा का महत्व कई पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है, जिसमें गणेश पुराण में इसका उल्लेख मिलता है।

9. क्या बच्चे भी गणेश चालीसा पढ़ सकते हैं?

हां, बच्चे भी सरल शब्दों और छोटे अंश पढ़ सकते हैं। इससे उनकी बुद्धि और भक्ति दोनों विकसित होती हैं।

10. क्या गणेश चालीसा का पाठ घर में करना चाहिए या मंदिर में?

पाठ घर, मंदिर या किसी भी पवित्र स्थान पर किया जा सकता है। घर में नियमित पाठ करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

11. गणेश चालीसा सुनने का क्या लाभ है?

सुनने से भी मानसिक शांति, मन की एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

12. क्या गणेश चालीसा का पाठ विशेष अवसरों पर करना चाहिए?

विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, परीक्षा या यात्रा जैसे शुभ अवसरों पर इसका पाठ विशेष लाभकारी माना जाता है।

13. गणेश चालीसा के साथ कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र के साथ पाठ करने से इसका प्रभाव बढ़ता है।

14. कितनी बार पढ़ना चाहिए?

दिन में कम से कम एक बार पाठ करने की सलाह दी जाती है। विशेष अवसरों पर 3, 11 या 21 बार पाठ करना शुभ है।

15. क्या गणेश चालीसा का पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है?

हां, नियमित भक्ति और पाठ से मानसिक शांति मिलती है और चिंता कम होती है।


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गणेश भगवान् आप पर कृपा करे

धन्यवाद।

The Significance of Ganesh Chalisa in Hindi PDF
हिंदू आध्यात्मिकता के क्षेत्र में गहरा महत्व रखती है। संत तुलसीदास द्वारा रचित यह पवित्र भजन, भगवान गणेश के प्रति गहरी भक्ति को दर्शाता है और परमात्मा से जुड़ने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में कार्य करता है।

जब भक्त गणेश चालीसा का पाठ करते हैं, तो वे बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश का आशीर्वाद मांगते हैं। चुनौतियों और अनिश्चितताओं के समय में यह एक आध्यात्मिक प्रकाशस्तंभ है, जो मार्गदर्शन और आशा की भावना प्रदान करता है।

गणेश चालीसा के मधुर छंद शांति और आध्यात्मिक अनुनाद का माहौल बनाते हैं। लयबद्ध जप सकारात्मक कंपन उत्पन्न करता है, आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है और उनमें शांति का संचार करता है।

अपने बाहरी अनुष्ठानों से परे, आंतरिक चिंतन की सुविधा भी देती है। प्रत्येक श्लोक गहरे अर्थ रखता है, आत्म-चिंतन को प्रोत्साहित करता है और आंतरिक शांति को बढ़ावा देता है। यह आध्यात्मिक ज्ञान के मार्ग पर एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में कार्य करता है।

Conclusion
अंत में, गणेश चालीसा भक्ति और विश्वास का एक कालातीत प्रमाण है। इस पवित्र भजन का जाप न केवल हमें परमात्मा से जोड़ता है बल्कि हमारी आध्यात्मिक यात्रा को भी समृद्ध करता है, जिससे हमें बाधाओं को दूर करने और आंतरिक शांति पाने में मदद मिलती है। यह भक्ति की स्थायी शक्ति और भगवान गणेश के शाश्वत आशीर्वाद के प्रमाण के रूप में खड़ा है।

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