🌺 श्री भैरव चालीसा – परिचय
श्री भैरव चालीसा भगवान शिव के उग्र एवं रक्षक स्वरूप काल भैरव की स्तुति है। यह चालीसा भक्त के जीवन से भय, शत्रु और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करती है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करता है, उसके जीवन में साहस, स्थिरता और आध्यात्मिक बल की वृद्धि होती है।
भैरव बाबा को काशी का कोतवाल कहा गया है, जो धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करते हैं। वे अपने भक्तों को सदैव न्याय और सुरक्षा प्रदान करते हैं। माना जाता है कि भैरव चालीसा के पाठ से जीवन के सभी संकट, रोग और बाधाएँ समाप्त होकर सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।
इस चालीसा का पाठ विशेष रूप से भैरव अष्टमी या रविवार के दिन करना अत्यंत फलदायी माना गया है। दीपक जलाकर, धूप-अगरबत्ती अर्पित कर और सच्चे मन से पाठ करने पर भैरव जी कृपा करते हैं और भक्त को भयमुक्त जीवन का वरदान देते हैं।
॥ श्री भैरव चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
श्री गणपति गुरु गौरी पद प्रेम सहित धरि माथ
चालीसा वंदन करो श्री शिव भैरवनाथ ॥1॥
श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल
श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल ॥2॥
जय जय श्री काली के लाला
जयति जयति काशी कुतवाला ॥3॥
जयति बटुक भैरव भय हारी
जयति काल भैरव बलकारी ॥4॥
जयति नाथ भैरव विख्याता
जयति सर्व भैरव सुखदाता ॥5॥
भैरव रूप कियो शिव धारण
भव के भार उतारण कारण ॥6॥
भैरव रव सुनि हवै भय दूरी
सब विधि होय कामना पूरी ॥7॥
शेष महेश आदि गुण गायो
काशी कोतवाल कहलायो ॥8॥
जटा जूट शिर चंद्र विराजत
बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥9॥
कटि करधनी घुंघरू बाजत
दर्शन करत सकल भय भाजत ॥10॥
जीवन दान दास को दीन्ह्यो
कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥11॥
वसि रसना बनि सारद काली
दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥12॥
धन्य धन्य भैरव भय भंजन
जय मनरंजन खल दल भंजन ॥13॥
कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा
कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोडा ॥14॥
जो भैरव निर्भय गुण गावत
अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥15॥
रूप विशाल कठिन दुख मोचन
क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥16॥
अगणित भूत प्रेत संग डोलत
बम बम बम शिव बम बम बोलत ॥17॥
रुद्रकाय काली के लाला
महा कालहू के हो काला ॥18॥
बटुक नाथ हो काल गंभीरा
श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥19॥
करत नीनहूं रूप प्रकाशा
भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥20॥
रत्न जड़ित कंचन सिंहासन
व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥21॥
तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं
विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥22॥
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय
जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥23॥
भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय
वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥24॥
महा भीम भीषण शरीर जय
रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥25॥
अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय
स्वानारूढ़ सयचंद्र नाथ जय ॥26॥
निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय
गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥27॥
त्रेसलेश भूतेश चंद्र जय
क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥28॥
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय
कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥29॥
रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर
चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥30॥
करि मद पान शम्भु गुणगावत
चौंसठ योगिन संग नचावत ॥31॥
करत कृपा जन पर बहु ढंगा
काशी कोतवाल अड़बंगा ॥32॥
देयं काल भैरव जब सोटा
नसै पाप मोटा से मोटा ॥33॥
जनकर निर्मल होय शरीरा
मिटै सकल संकट भव पीरा ॥34॥
श्री भैरव भूतों के राजा
बाधा हरत करत शुभ काजा ॥35॥
ऐलादी के दुख निवारयो
सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥36॥
सुन्दर दास सहित अनुरागा
श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥37॥
श्री भैरव जी की जय लेख्यो
सकल कामना पूरण देख्यो ॥38॥
॥ दोहा ॥
जय जय जय भैरव,
बटुक स्वामी संकट टार ॥39॥
कृपा दास पर कीजिए,
शंकर के अवतार ॥40॥
॥ इति श्री भैरव चालीसा सम्पूर्णम् ॥
Shri Bhairav Chalisa in English
॥ Shri Bhairav Chalisa ॥
॥ Doha ॥
Shri Ganpati Guru Gauri pad prem sahit dhari maath
Chalisa vandan karo Shri Shiv Bhairavnath ॥1॥
Shri Bhairav sankat haran mangal karan kripaal
Shyam varan vikraal vapu lochan laal vishaal ॥2॥
Jai Jai Shri Kaali ke laala
Jayati jayati Kaashi kutwaala ॥3॥
Jayati Batuk Bhairav bhay haari
Jayati Kaal Bhairav balkaari ॥4॥
Jayati Naath Bhairav vikhyaata
Jayati Sarv Bhairav sukhdaata ॥5॥
Bhairav roop kiyo Shiv dhaaran
Bhav ke bhaar utaaran kaaran ॥6॥
Bhairav rav suni havai bhay doori
Sab vidhi hoy kaamana poori ॥7॥
Shesh Mahesh aadi gun gaayo
Kaashi kotwaal kehlaayo ॥8॥
Jata joot shir chandr viraajat
Baala mukut bijaayath saajat ॥9॥
Kati karadhani ghunghroo baajat
Darshan karat sakal bhay bhaajat ॥10॥
Jeevan daan daas ko deenhyo
Keenyo kripa Naath tab cheenhyo ॥11॥
Vasi rasnaa bani Saarad Kaali
Deenhyo var raakhyo mam laali ॥12॥
Dhanya dhanya Bhairav bhay bhanjan
Jai manranjan khal dal bhanjan ॥13॥
Kar trishool damroo shuchi koda
Kripa kataaksh su-yash nahin thoda ॥14॥
Jo Bhairav nirbhay gun gaavat
Ashta siddhi nav nidhi phal paavat ॥15॥
Roop vishaal kathin dukh mochan
Krodh karaal laal duhun lochan ॥16॥
Aganit bhoot pret sang dolat
Bam Bam Bam Shiv Bam Bam bolat ॥17॥
Rudra kaay Kaali ke laala
Maha Kaalahu ke ho Kaala ॥18॥
Batuk Naath ho Kaal gambheera
Shwet rakt aru Shyaam shareera ॥19॥
Karat neenahu roop prakaasha
Bharat subhaktan kah shubh aasha ॥20॥
Ratna jadit kanchan singhaasan
Vyaghra charm shuchi narm su-aanan ॥21॥
Tumhi jaai Kaashihin jan dhyaavahin
Vishwanaath kah darshan paavahin ॥22॥
Jai Prabhu sanhaarak Sunand jai
Jai unnat Har Uma nand jai ॥23॥
Bheem Trilochan swaan saath jai
Vaijanath Shri Jagatnath jai ॥24॥
Maha bheem bheeshan shareer jai
Rudra Trayambak dheer veer jai ॥25॥
Ashwanaath jai Pretnath jai
Swaan aarooh saychandra Naath jai ॥26॥
Nimish Digambar Chakranaath jai
Gahat Anaathan Naath haath jai ॥27॥
Tresalesh Bhootesha Chandra jai
Krodh Vats Amaresh Nand jai ॥28॥
Shri Vaaman Nakulesh Chand jai
Krityaau keerati prachand jai ॥29॥
Rudra Batuk Krodhesh Kaaladhar
Chakra tunda dash paani vyaal dhar ॥30॥
Kari mad paan Shambhu gun gaavat
Chaunsath Yogin sang nachaavat ॥31॥
Karat kripa jan par bahu dhanga
Kaashi Kotwaal adabanga ॥32॥
Deyam Kaal Bhairav jab sota
Nasai paap mota se mota ॥33॥
Janakar nirmal hoy shareera
Mitai sakal sankat bhav peera ॥34॥
Shri Bhairav bhooton ke raaja
Baadha harat karat shubh kaaja ॥35॥
Ailaadi ke dukh nivaarayo
Sadaa kripakar kaaj sambhaarayo ॥36॥
Sundar daas sahit anuraaga
Shri Durvaasa nikat Prayaaga ॥37॥
Shri Bhairav ji ki jai lekhyo
Sakal kaamana pooran dekhyo ॥38॥
॥ Doha ॥
Jai Jai Jai Bhairav,
Batuk Swami sankat taar ॥39॥
Kripa daas par keejiyé,
Shankar ke avataar ॥40॥
॥ Iti Shri Bhairav Chalisa Sampurnam ॥
श्री भैरव चालीसा पाठ से होने वाले लाभ और महत्व
“श्री भैरव चालीसा” भगवान भैरव जी की आराधना का एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। इसका पाठ करने से जीवन के भय, शत्रु, दरिद्रता और नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त होती हैं। नीचे भैरव चालीसा पाठ के प्रमुख लाभ और उसके आध्यात्मिक प्रभाव बताए गए हैं —
⚔️ भय और नकारात्मकता से मुक्ति
भैरव चालीसा का नियमित पाठ व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के भय, भ्रम और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इससे आत्मबल और मानसिक स्थिरता में वृद्धि होती है।
🔥 शत्रु और बाधाओं का नाश
जो साधक श्रद्धा से चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन से शत्रु, तंत्र-मंत्र और बुरी शक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं। यह पाठ एक रक्षक कवच के समान कार्य करता है।
💰 धन, सफलता और उन्नति
भगवान भैरव की कृपा से जीवन में धन, प्रतिष्ठा और व्यवसायिक सफलता प्राप्त होती है। यह चालीसा आर्थिक कठिनाइयों को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है।
🧘 मानसिक शांति और संतुलन
भैरव जी की उपासना मन को शांति प्रदान करती है। यह पाठ तनाव, चिंता और अस्थिरता को दूर कर मन को स्थिर बनाता है।
🏠 गृह शांति और सुरक्षा
भैरव चालीसा का पाठ घर में शांति, सुरक्षा और सकारात्मक वातावरण लाता है। इससे वास्तु दोष और ग्रह बाधाएँ भी दूर होती हैं।
🕉️ मोक्ष और भक्ति की वृद्धि
यह चालीसा साधक के भीतर भक्ति, अनुशासन और आत्मज्ञान को जाग्रत करती है। भगवान भैरव की कृपा से व्यक्ति को मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।
श्री भैरव चालीसा का श्रद्धा और नियमपूर्वक पाठ करने से भय, संकट और शत्रु नष्ट होते हैं। भगवान भैरव की कृपा से जीवन साहसी, शांत और कल्याणमय बन जाता है।
🙏 श्री भैरव चालीसा पाठ विधि और पूजन नियम
भगवान भैरव की उपासना में शुद्धता, अनुशासन और श्रद्धा अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। भैरव चालीसा का पाठ यदि विधिपूर्वक किया जाए तो यह साधक के जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। नीचे भैरव पूजा और चालीसा पाठ की सही विधि दी गई है —
🕰️ पूजन का श्रेष्ठ समय
भैरव जी की पूजा रात्रि में मध्यकाल (रात 12 बजे के बाद) या भैरव अष्टमी के दिन करना सबसे शुभ माना गया है। सामान्य दिनों में रविवार अथवा मंगलवार को प्रातःकाल भी पूजा की जा सकती है।
🪔 पूजन सामग्री
दीपक (सरसों तेल का), लाल फूल, धूप, राई, नारियल, गुड़, काले तिल और कुत्ते को भोजन (रोटी/पकवान) अर्पित करना आवश्यक है। भैरव जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष पूजन करें।
📿 पाठ की विधि
स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। दीप जलाकर “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जप करें और फिर भैरव चालीसा का श्रद्धा से पाठ करें।
🍞 नैवेद्य और दान
पूजा के पश्चात भैरव जी को पकवान, गुड़ या पूरी का भोग लगाएँ। तत्पश्चात श्वान (कुत्ता) को भोजन कराना अत्यंत शुभ फल देता है और यह भैरव जी को अर्पण माना जाता है।
🧘 नियम और आचरण
पाठ के दिनों में सात्त्विक आहार ग्रहण करें, असत्य भाषण और क्रोध से दूर रहें। मन, वचन और कर्म से शुद्ध भाव बनाए रखना भैरव साधना की मुख्य कुंजी है।
🌕 विशेष पर्व और दिन
कालाष्टमी और भैरव अष्टमी पर चालीसा का पाठ करने से अत्यधिक शुभ फल प्राप्त होता है। इन दिनों में रात्रि जागरण और दीपदान करने का विशेष महत्त्व है।
यदि यह पूजा श्रद्धा, नियम और भक्ति से की जाए तो भगवान भैरव की कृपा से भय, रोग, दरिद्रता और शत्रु सब नष्ट होते हैं। जीवन में शांति, सफलता और दिव्य शक्ति का संचार होता है।
🔱 श्री भैरव चालीसा PDF
भगवान भैरव जी का यह पवित्र चालीसा भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने वाला माना गया है। जो भक्त नित्य श्रद्धा से इसका पाठ करता है, उसे साहस, आत्मबल और सफलता की प्राप्ति होती है। नीचे दिए गए बटन से आप इस चालीसा को ऑनलाइन पढ़ सकते हैं या PDF डाउनलोड कर सकते हैं।
काल भैरव चालीसा / पूजन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. काल भैरव चालीसा कब और कैसे पढ़ें?
रात्रि मध्य या भैरव अष्टमी को पढ़ना श्रेष्ठ माना जाता है; स्नान कर, शुद्ध वस्त्र पहनकर पूर्व/उत्तर मुख होकर दीप और धूप के साथ चालीसा का पाठ करें।
2. भैरव पूजा के लिए मुख्य सामग्री क्या चाहिए?
लाल फूल, दीप (सरसों/घी), धूप, नारियल, गुड़, काले तिल और यदि संभव हो तो श्वान (कुत्ते) को दान — ये पारंपरिक सामग्री हैं।
3. क्या महिलाएँ भैरव चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, श्रद्धा और पवित्रता से महिलाएँ भी चालीसा और भैरव पाठ कर सकती हैं — महत्वपूर्ण है मन का शुद्ध और केन्द्रित होना।
4. कितनी बार पढ़ना लाभकारी होता है?
नियमित प्रतिदिन एक बार श्रेष्ट है; विशेष व्रत/अष्टमी पर 3, 7 या 11 बार का पाठ अधिक फलदायक माना जाता है।
5. भैरव पाठ से कौन-से प्रमुख लाभ मिलते हैं?
भय व शत्रु नाश, मानसिक स्थिरता, सुरक्षा, रोग-दर्शन से मुक्ति और जीवन में साहस एवं सुरक्षा का अनुभव प्राप्त होता है।
6. पाठ के दौरान ध्यान में क्या रखें?
मन को व्यर्थ विचारों से मुक्त रखें, उच्चारण स्पष्ट रखें और जप के साथ भक्ति भाव बनाए रखें — संकल्प श्रद्धापूर्वक रखें।
7. क्या चालीसा सुनने मात्र से भी लाभ होगा?
हाँ — श्रद्धा से सुनने पर भी मन शांत होता है और भैरव की कृपा अनुभवित हो सकती है; सुनते समय ध्यान लगाने से प्रभाव बढ़ता है।
8. क्या किसी विशेष दिशा में बैठना चाहिए?
सामान्यतः पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पाठ करना शुभ माना जाता है; परन्तु शुद्ध स्थान और शान्ति सबसे महत्वपूर्ण है।
9. क्या पाठ के बाद दान देना ज़रूरी है?
पाठ के बाद दान (भोजन, द्रव्य या वस्तु) करने से पुण्य बढ़ता है और भैरव पूजा में विशेष फल मिलता है; पर यह अनिवार्य नहीं पर बहुत शुभ है।
10. क्या भैरव साधना से भय और शत्रु वशीकरण रुक जाते हैं?
नियमित और निष्ठापूर्वक साधना से भय कम होते हैं और जीवन में सुरक्षा बनी रहती है — परिणाम व्यक्ति की श्रद्धा और अनुशासन पर निर्भर करते हैं।
11. क्या किसी रोग या संकट में तुरंत पाठ करना चाहिए?
कठिन समय में श्रद्धा से पाठ करना फायदेमंद है; साथ ही धार्मिक उपायों के साथ आवश्यक वैद्यकीय/प्रायोगिक सहायता भी लें — दोनों साथ में रहें।
12. क्या मंत्र शब्दों का उच्चारण जरूरी है?
हाँ, सही उच्चारण और लय से पाठ प्रभावी बनता है; यदि संभव हो तो किसी प्रमाणित पाठक से सीख कर पढ़ें या सुनकर अनुसरण करें।
13. भैरव पाठ के साथ कौन से अन्य स्तोत्र सहायक हैं?
कालभैरवाष्टक, भैरव स्तोत्र, शिव-भजन और रुद्राक्ष जाप सहायक माने जाते हैं — पर मूलभूत बात श्रद्धा व नियमितता है।
14. क्या कोई वर्जित समय या स्थिति है?
अपवित्र अवस्था (भोजन के तुरंत बाद, क्रोधित मन) में पाठ न करें; शांत, शुद्ध और संयमित अवस्था श्रेष्ठ है।
🛕 ईष्ट देवता
अपनी ऊर्जा, भक्ति और जीवनशक्ति के अनुसार अपने ईष्ट देवता को पहचानें —
| ईष्ट देवता | संपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| 🔱 शिव जी | शिव |
| 💪 हनुमान जी | हनुमान |
| 🐕🦺 भैरव बाबा | भैरव |
| 🌺 दुर्गा माता | दुर्गा |
| 🪔 श्री कृष्ण | कृष्ण |
| 🐘 गणेश जी | गणेश |
| ⚡ काली माता | काली |
| 🏹 श्री राम | राम |
| 🌊 विष्णु भगवान | विष्णु |
| 💰 लक्ष्मी माता | लक्ष्मी |
🌺 अपने ईष्टदेवता को जानें
ईष्टदेवता वह शक्ति हैं जो आपके जीवन के मार्ग को प्रकाशित करती हैं। अपने ईष्टदेवता को जानकर आत्मिक शक्ति, संतुलन और मन की शांति प्राप्त करें।
🙏 ईष्टदेवता जानें




