sarve bhavantu sukhinah

सर्वे भवन्तु सुखिनः | Sarve Bhavantu Sukhinah in Sanskrit with Meaning

“सर्वे भवन्तु सुखिनः” प्राचीन वैदिक वाङ्मय का एक सार्वभौमिक मंगलकामना मंत्र है, जो केवल व्यक्तिगत सुख की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि पूरे समाज और विश्व के सभी प्राणियों की समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करता है। यह श्लोक सार्वभौमिक शांति, सद्भाव और समग्र कल्याण का संदेश देता है।

इसमें ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ — अर्थात् समस्त विश्व एक परिवार है — की भावना समाहित है। यह मंत्र हमें करुणा, सहअस्तित्व और परस्पर प्रेम का संदेश देता है।

Shanti Mantra / Om Sarve Bhavantu Sukhinah

Sanskrit

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दुःख भगभवेत्।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

English Transliteration

Om Sarve Bhavantu Sukhinah
Sarve Santu Niraamayaah
Sarve Bhadraanni Pashyantu
Maa Kashcid-Duhkha-Bhaag-Bhavet
Om Shaanti… Shaanti… Shaanti… ॥

Sarve Bhavantu Sukhinah
Sarve Bhavantu Sukhinah

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः इस लोककल्याण शांति मंत्र का अनुवाद निचे दिया गया है,

मंत्र / श्लोक हिंदी अर्थ इंग्लिश अर्थ
सर्वे भवन्तु सुखिनःसभी सुखी हों।May all become happy
सर्वे सन्तु निरामयाःसभी रोगमुक्त (निरोगी) रहें।May all be free from illness
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु:सभी मंगलमय घटनाओं को देखें।May all see auspiciousness/good everywhere
मा कश्चित् दुःखभाग्भवेत्:किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।May no one suffer
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ॐ शांति शांति शांति ॥Om, Peace, Peace, Peace
Sarve Bhavantu Sukhinah
  • सहानुभूति और करुणा बढ़ती है – यह मंत्र पढ़ने से हृदय में सभी प्राणियों के प्रति करुणा और प्रेम की भावना जागृत होती है।
  • सकारात्मक सोच का विकास – जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण और शुभकामनाओं की भावना बढ़ती है।
  • शांति और मानसिक संतुलन – यह शांति पाठ तनाव और मानसिक अस्थिरता को कम करने में सहायक है।
  • समाज में सौहार्द और सद्भाव – इसे सामूहिक रूप से पढ़ने से समाज में सहयोग, एकता और सौहार्द की भावना प्रबल होती है।
  • आध्यात्मिक विकास – यह मंत्र आत्मिक उन्नति, ध्यान और साधना में मदद करता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार – घर या कार्यस्थल में इसका नियमित पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

“सर्वे भवन्तु सुखिनः” केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि जीवन जीने का मार्गदर्शन है। यह हमें सिखाता है कि हमारा सुख और शांति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज और संसार के लिए भी होना चाहिए। इसे पढ़ने और आत्मसात करने से हम हर परिस्थिति में दूसरों के कल्याण की कामना करने वाले बन जाते हैं।

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