Gajanan Maharaj Aarti पढ़ें और जानें पूरी आरती का हिंदी अर्थ, महत्व और इसे कैसे पढ़ें। भक्ति और शांति के लिए ।
यह आरती Gajanan Maharaj के प्रति भक्ति और समर्पण व्यक्त करती है।
इसमें भक्त महाराज से अपनी रक्षा, मार्गदर्शन और संकट निवारण की प्रार्थना करते हैं।
॥ श्री गजानन महाराज आरती ॥
जय जय सतचित स्वरूपा स्वामी गणराया।
अवतरलासी भूवर जड मुढ ताराया॥
जयदेव जयदेव ॥धृ॥
निर्गुण ब्रह्म सनातन अव्यय अविनाशी।
स्थिरचर व्यापून उरलें जे या जगताशी॥
तें तूं तत्त्व खरोखर निःसंशय अससी।
लीलामात्रें धरिलें मानव देहासी॥
जयदेव जयदेव ॥१॥
होऊं न देशी त्याची जाणिव तूं कवणा।
करूनी गणि गण गणांत बोते या भजना॥
धाता हरिहर (नरहरी) गुरुवर तूंचि सुखसदना।
जिकडें पहावे तिकडे तूं दिससी नयना॥
जयदेव जयदेव ॥२॥
लीला अनंत केल्या बंकट सदनास।
पेटविलें त्या अग्नीवाचूनी चिलमेस॥
क्षणांत आणिलें जीवन निर्जल वापीस।
केला ब्रह्मगिरीच्या गर्वाचा नाश॥
जयदेव जयदेव ॥३॥
व्याधी वारून केलें कैकां संपन्न।
करविले भक्तालागी विठ्ठल दर्शन॥
भवसिंधू हा तरण्या नौका तव चरण।
स्वामी दासगणूचे मान्य करा कवन॥
जयदेव जयदेव ॥४॥
जय जय सतचित-स्वरूपा स्वामी गणराया।
अवतरलासी भूवर जड मुढ ताराया॥
जयदेव जयदेव…
गजानन महाराज आरती – क्षमापनम्
अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम ।
तस्मात्कारूण्यभावेन रक्षरक्ष परमेश्वर ।
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर ।
यत्पुजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे ।
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम् ।
पुजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर ।।
श्री समर्थ सद्गुरू गजानन महाराज की जय ।।
जय जय रघुवीर समर्थ








