सजा दो घर को गुलशन सा भजन
यह भजन “सजा दो घर को गुलशन सा” भगवान के आगमन की आनंदमयी अनुभूति को दर्शाता है। जब भक्त अपने ईश्वर के स्वागत में प्रेम और भक्ति से घर सजाते हैं, तब हर कोना एक मंदिर बन जाता है। इस भजन में भावनाओं की मधुरता और आस्था की गहराई स्पष्ट झलकती है, जो सुनने वाले के मन को भक्ति और शांति से भर देती है।
“मेरे सरकार आये हैं” की पुनरावृत्ति उस आत्मिक प्रसन्नता का प्रतीक है, जब भक्त अपने आराध्य के स्वागत में झूम उठता है। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भक्ति का उत्सव है — जो प्रेम, विश्वास और समर्पण का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
सजा दो घर को गुलशन सा
सजा दो घर को गुलशन सा,
मेरे सरकार आये है…
मेरे सरकार आये है…
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
मेरे सरकार आये है…
सजा दो घर को गुलशन सा,
मेरे सरकार आये है… ॥ १ ॥तर्ज – जगत के रंग में क्या देखु।
पखारो इनके चरणो को…
बहा कर प्रेम की गंगा,
बहा कर प्रेम की गंगा,
बिछा दो अपनी पलको को,
मेरे सरकार आये है…
सजा दो घर को गुलशन सा,
मेरे सरकार आये है… ॥ २ ॥उमड़ आई मेरी आँखे,
देख कर अपने बाबा को,
देख कर अपने बाबा को…
हुई रोशन मेरी गलियां,
मेरे सरकार आये है…
सजा दो घर को गुलशन सा,
मेरे सरकार आये है… ॥ ३ ॥तुम आकर फिर नहीं जाना,
मेरी इस सुनी दुनिया से,
मेरी इस सुनी दुनिया से,
कहूँ हर दम यही सब से,
मेरे सरकार आये है…
सजा दो घर को गुलशन सा,
मेरे सरकार आये है… ॥ ४ ॥सजा दो घर को गुलशन सा,
मेरे सरकार आये है,
मेरे सरकार आये है,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
मेरे सरकार आये है…,
सजा दो घर को गुलशन सा ॥ ५ ॥
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