भगवान श्री कृष्ण हमारे जीवन में प्रेम, आनंद और भक्ति का संदेश लेकर आते हैं। उनकी मुरली की मधुर धुन और राधा संग रास लीला का वर्णन हृदय को आनंदित करता है।
हर पंक्ति में उनकी लीलाओं और करुणामयी दृष्टि का अनुभव होता है। इस आरती के माध्यम से मन को शांति और हर्ष का अनुभव होता है।
भक्त अपने मन, वचन और कर्म से श्री कृष्ण की स्तुति करते हैं और उनके आशीर्वाद का आनंद पाते हैं। आइए, इस आरती के माध्यम से अपने हृदय को प्रेम और भक्ति से भरें।
॥ आरती कुंजबिहारी की ॥
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली;
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;
ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ 1 ॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ 2 ॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा;
बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;
चरन छवि श्रीबनवारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ 3 ॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;
हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद;
टेर सुन दीन भिखारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ 4 ॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ 5 ॥
आरती का भावार्थ:
यह आरती भगवान श्री कृष्ण के अद्भुत रूप और लीलाओं का वर्णन करती है।
उनके गले की बैजंती माला, मुरली की मधुर धुन और राधा संग रास का वर्णन भक्तों के हृदय में प्रेम और भक्ति जाग्रत करता है।
श्री कृष्ण आरती – पाठ विधि
- साफ-सफाई और स्थान सजाना
- सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें।
- श्री कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर को सुंदर तरीके से सजाएँ।
- फूल, दीपक, अगरबत्ती और भोग सामग्री तैयार रखें।
- स्नान और शुद्ध कपड़े
- आरती से पहले स्वयं स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- दीपक और अगरबत्ती प्रज्वलित करना
- भगवान कृष्ण के सामने दीपक जलाएँ और अगरबत्ती लगाएँ।
- आरती का पाठ
- आरती को एकाग्र मन से गाएँ या सुनें।
आप चाहें तो “आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…” से आरंभ कर सकते हैं।
भोग अर्पित करना: आरती के बाद फल, मिठाई या प्रसाद भगवान को अर्पित करें।
इसे “भोग लगाने” के बाद घर के सभी लोग प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।
प्रसन्नता और भक्ति भाव: आरती के दौरान भगवान कृष्ण की लीलाओं का ध्यान करें।
मन में प्रेम और भक्ति का भाव बनाए रखें।
श्री कृष्ण आरती (आरती कुंजबिहारी की) के लाभ
हृदय में शांति और आनंद – आरती करने से मन शांत होता है और तनाव दूर होता है।
भक्ति और आत्मिक शक्ति में वृद्धि – भगवान कृष्ण की स्तुति से भक्ति भाव गहरा होता है और आत्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार – घर और आस-पास का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।
संकटों से मुक्ति – आरती के नियमित पाठ से जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं और समस्याओं का समाधान आसान होता है।
आशीर्वाद और कल्याण – श्री कृष्ण की आरती करने से आशीर्वाद प्राप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आरती के अंत में अपने हृदय में भगवान श्री कृष्ण का स्मरण करें और उनके चरणों में प्रेम और भक्ति समर्पित करें। उनका आशीर्वाद हम सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाए। आइए, हर दिन श्री कृष्ण की लीलाओं और दिव्यता का स्मरण करके अपने जीवन को आनंद और उल्लास से भरें।







