संतान गोपाल मंत्र – Santan Gopal Mantra
संतान गोपाल मंत्र संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना गया है। सामान्यतः विवाह के उपरांत नवदम्पती को संतान की प्राप्ति स्वाभाविक रूप से होती है, परंतु कभी-कभी प्रारब्ध या ग्रहबाधा के कारण संतान प्राप्ति में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
ऐसे समय में व्यक्ति औषधीय उपचार के साथ-साथ देव आराधना, अनुष्ठान और हरिवंश पुराण के श्रवण का सहारा लेता है। यद्यपि प्रबल प्रारब्ध को बदलना कठिन होता है, फिर भी आस्था और नियमित साधना से अधिकतर लोगों को सफलता प्राप्त होती है।
हमारे शास्त्रों में संतान प्राप्ति के लिए मंत्र अनुष्ठान की विधि बताई गई है। इन्हें यदि श्रद्धा और सावधानीपूर्वक किया जाए, तो निश्चित रूप से फल प्राप्त होता है। नीचे प्रस्तुत की जा रही विधियाँ सनत्कुमार संहिता के आधार पर दी गई हैं, जिनमें संतान गोपाल मंत्र के जप और उसकी प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है।
🌸 संतान गोपाल मंत्र विधि
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
संतान गोपाल मंत्र अनुष्ठान के लिए शास्त्रों में प्रायः तीन प्रमुख मंत्र बताए गए हैं।
यहाँ इन मंत्रों को उनके विधि-विधान सहित बताया गया है ताकि साधक अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार किसी एक का चयन कर सके।
इन मंत्रों का सच्चे भाव से जप करने पर भगवान श्रीकृष्ण के संतान गोपाल रूप की कृपा प्राप्त होती है।
अनुष्ठान प्रारंभ करने से पहले, स्नानादि कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध आसन पर बैठें। तत्पश्चात शिखा बंधन, आचमन और प्राणायाम करके मन को एकाग्र करें। अब भगवान गणेश जी का स्मरण निम्नलिखित मंत्र से करें —
“गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थ जम्बूफल चारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥”
इसके बाद साधक को संकल्प करना चाहिए — अर्थात् अपनी मनोकामना (जैसे संतान प्राप्ति की इच्छा) व्यक्त करते हुए, अनुष्ठान के उद्देश्य और अवधि को मन में दृढ़ निश्चय से धारण करना चाहिए। नीचे एक उदाहरण दिया गया है कि संकल्प कैसे बोला जा सकता है।
🌺 पूजा में संकल्प कैसे करें?
किसी भी मंत्र जप, अनुष्ठान या पूजा का आरंभ करने से पहले संकल्प लेना अत्यंत आवश्यक माना गया है। संकल्प का अर्थ है – अपने उद्देश्य, समय, स्थान और भावना को देवता के समक्ष स्पष्ट रूप से व्यक्त करना। यह साधक के मन को एकाग्र करता है और पूजा की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है।
नीचे संतान गोपाल मंत्र जप हेतु पारंपरिक संकल्प मंत्र का शास्त्रीय स्वरूप दिया गया है — इसे धीरे-धीरे श्रद्धा से पढ़ना चाहिए और “…” स्थानों पर अपना नाम, गोत्र, स्थान और तिथि भरना चाहिए।
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः नमः पुराणपुरुषोत्तमाय ॐ तत्सत्
अद्येतस्य अचिन्त्यशक्तेर्महाविष्णोराज्ञया जगत्सृष्टिकर्मणि प्रवर्तमानस्य परार्धद्रयजीविनो ब्रह्मणो द्वितीयपरा्ं
श्रीश्वेतवाराहकल्ये वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षं
भरतखण्डे आर्यावतैकटेशान्तर्गते प्रजापतिश्चेत्रे “स्थाने ……..” “संवत्सरे ……..” “अयने ……..”
“ऋतौ ……..” “मासे ……..” “पक्षे ……..” “तिथौ ……..” “वासरे ……..”
एवं ग्रहगुणगणविशोषणविशिष्टायां शुभपुण्यतिथौ “गोत्रः ……..” “शर्मा / वर्मा / गुप्तोऽहम्”
अस्यामेव जन्मनि अस्यामेव पाणिग्रहीत्यां धर्मपल्यां भगवद्धक्तस्य सदाचारनिष्ठस्य
सनातनधर्मनिरतस्य चिरञ्जीविनः वंशप्रवर्तकस्य स्वात्मजस्योत्पत्त्यर्थं वंशानुवृध्यर्थं
सन्ततिप्रतिबन्धकग्रहजन्यदोषनिवृत्तिपूर्वकं श्रीराधामाधवप्रीत्यर्थं च
सन्तान गोपाल मंत्रस्य जपं तथा सन्तान गोपाल स्तोत्र पाठं करिष्ये।
संकल्प करने के पश्चात् साधक को भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के संतान गोपाल रूप का ध्यान कर विधिपूर्वक मंत्र जप एवं स्तोत्र पाठ आरंभ करना चाहिए। श्रद्धा और नियमितता से किया गया यह अनुष्ठान शीघ्र ही मनोवांछित फल प्रदान करता है।
🌸 ०१). संतान गोपाल मंत्र – प्रथम मंत्र विधि
🔹 विनियोग
पूजन आरंभ करने से पूर्व नीचे दिए गए विनियोग मंत्र का पाठ करें। इससे साधना का उद्देश्य, ऋषि, छंद और देवता का आह्वान होता है।
अस्य श्रीसन्तानगोपालमंत्रस्य श्रीनारद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीकृष्णो देवता, ग्लौं बीजम्, नमः शक्तिः, पुत्रार्थे जपे विनियोगः॥
🔹 अंगन्यास विधि
अब नीचे दिए गए अंगन्यास मंत्र बोलकर, बताए अनुसार शरीर के भागों का स्पर्श करें —
- “देवकीसुत गोविन्द” — हृदयाय नमः (दाहिने हाथ की मध्यमा, अनामिका और तर्जनी से हृदय स्पर्श करें)
- “वासुदेव जगत्पते” — शिरसे स्वाहा (सिर का स्पर्श करें)
- “देहि मे तनयं कृष्ण” — शिखायै वषट् (अंगूठे से शिखा का स्पर्श करें)
- “त्वामहं शरणं गतः” — कवचाय हुम् (दोनों भुजाओं का स्पर्श करें)
- “ॐ नमः” — अस्त्राय फट् (हाथ को सिर से घुमाकर तर्जनी व मध्यमा से बायीं हथेली पर ताली बजाएं)
🔹 ध्यान
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान नीचे बताए अनुसार करें —
वैकुण्ठादागतं कृष्णं रथस्थं करुणानिधिम्।
किरीटिसारथिं पुत्रमानयन्तं परात्परम्॥
आदाय तं जलस्थं च गुरवे वैदिकाय च।
अर्पयन्तं महाभागं ध्यायेत् पुत्रार्थमच्युतम्॥
अर्थ — श्रीकृष्ण भगवान करुणा के सागर हैं, वे वैकुण्ठ से रथ पर सवार होकर अपने गुरु सांदीपनि ऋषि के पुत्र को लौटाते हुए दिखते हैं। साधक को इसी रूप में भगवान पार्थसारथि अच्युत का ध्यान करना चाहिए।
🔹 मूल मंत्र
“ॐ श्रीं हीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥”
यह संपूर्ण संतान गोपाल मूल मंत्र है। श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका तीन लाख बार जप करना सर्वोत्तम माना गया है।
🔹 मंत्र का अर्थ
हे सच्चिदानंद स्वरूप, ऐश्वर्यवान, करुणामय, सौम्य श्रीकृष्ण! हे देवकीनंदन, गोविंद, वासुदेव, जगत्पते! मैं आपकी शरण में आया हूँ — कृपा कर मुझे पुत्र प्रदान करें।
🌼 ०२). संतान गोपाल मंत्र – द्वितीय मंत्र विधि
🔹 विनियोग
संतान प्राप्ति हेतु इस द्वितीय संतान गोपाल मंत्र का विनियोग नीचे दिया गया है। इससे साधना के ऋषि, छंद, देवता और उद्देश्य का निर्धारण होता है।
अस्य श्रीसन्तानगोपालमन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः,
गायत्री छन्दः, श्रीकृष्णो देवता,
क्लीं बीजम्, नमः शक्तिः, पुत्रार्थे जपे विनियोगः॥
🔹 अंगन्यास विधि
निम्नलिखित अंगन्यास मंत्रों का उच्चारण करते हुए शरीर के अंगों का स्पर्श करें —
- ग्लौं — हृदयाय नमः
- क्लीं — शिरसे स्वाहा
- हीं — शिखायै वषट्
- श्रीं — कवचाय हुम्
- ॐ — अस्त्राय फट्
🔹 ध्यान
अब भगवान श्रीकृष्ण का नीचे दिए अनुसार ध्यान करें —
शङ्खचक्रगदापदां दधानं सूतिकागृहे ।
अङ्क शयानं देवक्याः कृष्णं वन्दे विमुक्तये ॥
अर्थ — जो भगवान श्रीकृष्ण सूतिकागृह (जन्मस्थान) में माता देवकी की गोद में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए शयन कर रहे हैं, उन प्रभु को मैं संतान-प्राप्ति में आने वाले सभी प्रतिबंधों से मुक्त होने के लिए नमस्कार करता हूँ।
🔹 मूल मंत्र
“ॐ नमो भगवते जगदात्मसूतये नमः॥”
इस संतान गोपाल द्वितीय मंत्र का अर्थ है — “जिन भगवान श्रीकृष्ण के लिए यह सम्पूर्ण जगत् उनकी संतान समान है, उन विश्वरूप प्रभु को मेरा साष्टांग नमस्कार।”
इस मंत्र का तीन लाख बार जप अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा, नियम और भक्ति से किया गया यह जप शीघ्र संतान-सुख प्रदान करता है।
🌼 ०३). संतान गोपाल मंत्र – तृतीय मंत्र विधि
🔹 विनियोग
यह तृतीय संतान गोपाल मंत्र सनत्कुमार ऋषि द्वारा वर्णित माना गया है। इसका विनियोग निम्न प्रकार से किया जाता है —
ॐ अस्य श्रीसन्तानगोपालमन्त्रस्य श्रीनारद ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, श्रीकृष्णो देवता,
ग्लो बीजम्, नमः शक्तिः, पुत्रार्थे जपे विनियोगः॥
🔹 अंगन्यास विधि
इस मंत्र का अंगन्यास निम्न प्रकार से करें —
- “देवकीसुत गोविन्द” — हृदयाय नमः
- “वासुदेव जगत्पते” — शिरसे स्वाहा
- “देहि मे तनयं कृष्ण” — शिखायै वषट्
- “त्वामहं शरणं गतः” — कवचाय हुम्
- “देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥” — अस्त्राय फट्
🔹 ध्यान
अब भगवान श्रीकृष्ण का नीचे दिए अनुसार ध्यान करें —
धारयन्तं जनार्दनं शयानं देवक्याः सूतिकामन्दिरे शुभे ॥
एवं रूपं सदा कृष्णं सुतार्थं भावयेत् सुधीः ॥
अर्थ — पुत्र की प्राप्ति के लिए साधक को सदैव उस श्रीकृष्ण का ध्यान करना चाहिए जो शुभ सूतिकागार (जन्मस्थान) में माता देवकी की गोद में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए शयन कर रहे हैं।
🔹 मूल मंत्र
“ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥”
अर्थ — हे देवकी के पुत्र, गोविंद, वासुदेव, जगत के पालनकर्ता श्रीकृष्ण! कृपया मुझे एक पुत्र प्रदान करें, क्योंकि मैं आपकी शरण में आया हूँ।
इस सनत्कुमारोक्त संतान गोपाल मंत्र का तीन लाख बार जप करने से साधक को शीघ्र ही संतान-सुख की प्राप्ति होती है। यह मंत्र अत्यंत सिद्ध और प्रभावशाली माना गया है।
🌺 संतान गोपाल मंत्र अनुष्ठान के लिए पूजा कैसे करें?
संतान प्राप्ति के लिए संतान गोपाल मंत्र अनुष्ठान एक अत्यंत फलदायी और शुभ साधना मानी जाती है। यह साधना विशेषकर शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आधी रात में की जानी चाहिए। नीचे संपूर्ण विधि चरणबद्ध रूप में दी गई है —
🔹 पूजा प्रारंभ
- शुद्ध होकर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठें।
- भूमि पर स्वस्तिक बनाकर उस पर घी से भरा हुआ सकोरा (कोसा) स्थापित करें।
- रुई की बत्ती डालकर शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- अष्टदल कमल बनाकर उस पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
🔹 कलश स्थापना और पूजन
अब दो कलशों में जल भरें और उन्हें विधिपूर्वक स्थापित करें। इन दोनों कलशों में भगवान श्रीकृष्ण का आवाहन करके पूर्वोक्त विधि से पूजन करें।
तत्पश्चात अनन्यभाव से एक हजार आठ या एक सौ आठ बार संतान गोपाल मंत्र का जप करें।
🔹 द्वादशी पूजा एवं भोग
द्वादशी के दिन पुनः भगवान गोविंद की पूजा करें और अगहनी चावल, गाय का घी, गुड़ और स्वादिष्ट खीर का भोग लगाएँ। साथ में दाल, भात, सुस्निग्ध व्यंजन, गाय के दूध का दही और खोंड भी रखें। इन सबको सोने के पात्र में रखकर भगवान विष्णु को समर्पित करें। स्वच्छ, सुवासित कर्पूर-गुलाब जल से अर्घ्य दें।
🔹 ब्राह्मण पूजन एवं हवन
अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएँ। फिर अग्नि में भगवान विष्णु का आवाहन कर १०८ या २८ बार हविष्य (खीर) की आहुति दें। इसके बाद ८०० बार घी की आहुति करें।
हुतशेष घृत को दोनों कलशों में डालें और उस घृत मिश्रित जल से दम्पत्ति का अभिषेक करें। फिर एक सौ आठ बार मंत्र जप कर बचा हुआ हविष्य पत्नी के हाथ में दें।
🔹 हविष्य ग्रहण और समापन
यजमान-पत्नी पूर्वाभिमुख होकर बैठें और उस हविष्य को श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए ग्रहण करें। उस समय यह भावना करें कि — “भगवान श्रीकृष्ण स्वयं मेरे उदर में आकर विराजमान हुए हैं।”
तत्पश्चात ब्राह्मणों को मोदक, पान आदि से तृप्त करें, उनके चरणों में सिर झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त करें। ब्राह्मणों द्वारा “आपकी संतति सफल हो” यह आशीर्वाद मिलने के बाद स्वयं प्रसन्न मन से भोजन करें।
🔹 फल और विशेष परिणाम
जो भक्त शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु की भक्ति से यह अनुष्ठान करता है, उसे शीघ्र ही तेजस्वी, बुद्धिमान और दीर्घायु पुत्र की प्राप्ति होती है। वह संतान वंश परंपरा को आगे बढ़ाने वाली होती है।
जो ब्राह्मण या साधक आर्थिक रूप से समर्थ न हो, वह यदि पूर्वोक्त मंत्र का नियमित जप एवं तर्पण करे तो उसे भी संतान की प्राप्ति होती है।
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🌸 संतान गोपाल मंत्र के लाभ
संतान गोपाल मंत्र भगवान श्रीकृष्ण का अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी मंत्र है। यह केवल संतान प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि संतान के स्वास्थ्य, संस्कार और दीर्घायु के लिए भी दिव्य आशीर्वाद प्रदान करता है। जो दंपत्ति श्रद्धा, नियम और भक्ति से इसका जप करते हैं, उन्हें शीघ्र शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
🔹 मुख्य लाभ
- संतान प्राप्ति में सहायक — जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में बाधा हो, उनके लिए यह मंत्र अत्यंत फलदायी है।
- संतान की रक्षा — यह मंत्र संतान को नकारात्मक शक्तियों, भय और दुर्भाग्य से सुरक्षित रखता है।
- उत्तम संस्कार एवं बुद्धिमत्ता — नियमित जप से संतान के विचारों में शुद्धता आती है, और वह संस्कारी व तेजस्वी बनता है।
- मानसिक शांति और पारिवारिक सुख — संतान सुख प्राप्त होने पर दंपत्ति को आत्मिक शांति व आनंद की अनुभूति होती है।
- संतान के स्वास्थ्य में सुधार — यह मंत्र संतान की शारीरिक व मानसिक प्रगति में सहायक होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति — इस मंत्र का जप दंपत्ति के जीवन में भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मकता को बढ़ाता है।
🌼 नियमित जप का फल: प्रतिदिन या गुरुवार को शुद्ध मन से संतान गोपाल मंत्र का जप करने से जीवन में संतति सुख, पारिवारिक समृद्धि और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होता है।
🙏 यह दिव्य मंत्र न केवल संतान का आशीर्वाद देता है, बल्कि जीवन में श्रीकृष्ण कृपा का साकार अनुभव कराता है।
संतान गोपाल मंत्र से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)
1. संतान गोपाल मंत्र कब जपना चाहिए?
संतान गोपाल मंत्र का जप प्रातःकाल या गुरुवार को सबसे शुभ माना गया है। स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करना चाहिए।
2. संतान गोपाल मंत्र कौन जप सकता है?
संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले किसी भी विवाहित स्त्री-पुरुष द्वारा यह मंत्र जपा जा सकता है। दंपत्ति साथ में जप करें तो अधिक फल मिलता है।
3. कितनी बार जप करना चाहिए?
इस मंत्र का तीन लाख बार जप सर्वोत्तम माना गया है। प्रतिदिन 108 या 1008 बार जप करना भी शुभ फलदायी होता है।
4. जप के समय कौन-सी सामग्री आवश्यक है?
जप के समय भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र, तुलसी की माला, घी का दीपक और स्वच्छ आसन का उपयोग करना चाहिए।
5. संतान गोपाल मंत्र का फल कब मिलता है?
नियमित और श्रद्धा-पूर्वक जप करने से तीन से छह महीने के भीतर शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।
🛕 ईष्ट देवता
अपनी ऊर्जा, भक्ति और जीवनशक्ति के अनुसार अपने ईष्ट देवता को पहचानें —
| ईष्ट देवता | संपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| 🔱 शिव जी | शिव |
| 💪 हनुमान जी | हनुमान |
| 🐕🦺 भैरव बाबा | भैरव |
| 🌺 दुर्गा माता | दुर्गा |
| 🪔 श्री कृष्ण | कृष्ण |
| 🐘 गणेश जी | गणेश |
| ⚡ काली माता | काली |
| 🏹 श्री राम | राम |
| 🌊 विष्णु भगवान | विष्णु |
| 💰 लक्ष्मी माता | लक्ष्मी |
🌺 अपने ईष्टदेवता को जानें
ईष्टदेवता वह शक्ति हैं जो आपके जीवन के मार्ग को प्रकाशित करती हैं। अपने ईष्टदेवता को जानकर आत्मिक शक्ति, संतुलन और मन की शांति प्राप्त करें।
🙏 ईष्टदेवता जानें






