राधे राधे बोल श्याम भागे चले आयेंगे। एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे
भक्ति की परंपरा में यह विश्वास गहराई से जुड़ा है कि जब कोई सच्चे मन से “राधे राधे” का नाम लेता है, तो भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उस पुकार पर उपस्थित हो जाते हैं।
भजन “राधे राधे बोल श्याम भागे चले आयेंगे” इसी अटूट प्रेम और भक्ति की भावना को दर्शाता है।
इसमें यह संदेश छिपा है कि राधा नाम का स्मरण करने वाला भक्त न तो स्वर्ग की आकांक्षा रखता है और न ही किसी लोक की, क्योंकि उसके लिए राधे-श्याम का प्रेम ही जीवन का सबसे बड़ा वरदान है।
इस गीत के प्रत्येक शब्द में ब्रजभूमि की मधुरता और राधा-कृष्ण की लीला का रस झलकता है।
यह भजन हमें सिखाता है कि जब हृदय प्रेम और समर्पण से भर जाता है, तब “राधे राधे” का नाम ही साधना, भक्ति और मुक्ति — तीनों का आधार बन जाता है।
॥ राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयेंगे ॥
राधे राधे बोल, श्याम भागे चले आयेंगे।
एक बार आ गए तो कबू नहीं जायेंगे ॥ 1 ॥
सात स्वर्ग पांच अपवर्ग ठुकरायेंगे।
बैकुंठ की भी कम्मना ना उर लायेंगे।
राधे राधे गायेंगे ॥ 2 ॥
प्रियतम के सुख में ही सुख पायेंगे।
बृज रस में ही नित्त मन को डूबायेंगे ॥ 3 ॥
पिय ठुकरावे हम प्यार किये जाएंगे।
पिय कहु जनि आवे हम रोय जाएंगे ॥ 4 ॥
पिय नहीं आयेंगे तो प्यारी को बुलायेंगे।
प्यारी जब आएँगी तो प्यारे भाजे आएंगे ॥ 5 ॥
राधे जू के गुण गण मुरली में गाएंगे।
राधे जू की छबी लखि बलि बलि जायेंगे ॥ 6 ॥
राधे जू की छबी लखि बलि बलि जायेंगे।
जय हो जय हो कहि कहि बुजन उठाएंगे ॥ 7 ॥
राधा भाव गहि श्याम, श्याम श्याम गायेंगे।
हम तो ‘कृपालुʼ राधे श्याम नाम गायेंगे ॥ 8 ॥







